पंजाब और हरियाणा उच्च न्यायालय ने गुरुवार को एक याचिका पर सुनवाई के लिए 5 अक्टूबर की तारीख तय की।जनहित में दायर इस याचिका में पंजाब सरकार द्वारा जारी “मुख मंत्री मावन धीयां सत्कार योजना” की अधिसूचना को चुनौती दी गई है। मुख्य न्यायाधीश अश्वनी कुमार मिश्रा और न्यायमूर्ति रोहित कपूर की पीठ को अन्य बातों के अलावा यह बताया गया कि यह योजना केवल वोट हासिल करने के लिए शुरू की गई थी।
पारदर्शिता, सुशासन, जवाबदेही और जनहित की रक्षा के क्षेत्र में काम करने वाली एक धर्मार्थ संस्था के रूप में खुद का वर्णन करते हुए, याचिकाकर्ता हरबख्श चैरिटेबल सोसाइटी ने तर्क दिया कि योजना के तहत पंजाब राज्य में मतदाता के रूप में पंजीकृत अनुसूचित जाति श्रेणी की महिलाओं को 1,500 रुपये और अन्य महिलाओं को 1,000 रुपये की मासिक वित्तीय सहायता प्रदान की जाती है।
पीठ के समक्ष पेश होते हुए, याचिकाकर्ता ने अधिवक्ताओं वरुण दत्ता और करण भारद्वाज के माध्यम से तर्क दिया कि 2 अप्रैल को अधिसूचित योजना को “इस आधार पर चुनौती दी जा रही है कि इसका उद्देश्य केवल सत्ताधारी दल के पक्ष में वोट हासिल करना है”।
विस्तार से बताते हुए वकील ने कहा कि योजना के खंड 9 में योजना के तहत लाभ प्राप्त करने के लिए आवश्यक दस्तावेजों का उल्लेख है। “यह दावा किया जाता है कि योजना के तहत लाभ प्राप्त करने के लिए भारत निर्वाचन आयोग द्वारा जारी पंजाब राज्य के मतदाता पहचान पत्र की अनिवार्य आवश्यकता स्पष्ट रूप से इंगित करती है कि योजना का उद्देश्य केवल लाभार्थियों से वोट प्राप्त करना है।”
आगे यह तर्क दिया गया कि मतदाता पहचान पत्र पहचान आदि के प्रयोजनों के लिए आवश्यक दस्तावेजों में से एक हो सकता है, लेकिन योजना के तहत लाभ प्रदान करने के लिए इसे अनिवार्य रूप से आवश्यक बनाना “इसके उद्देश्य को स्पष्ट करता है, अर्थात् वोट हासिल करने के बदले में लेन-देन के रूप में कार्य करना”।
पंजाब के अतिरिक्त महाधिवक्ता ने याचिकाकर्ता के दावे का विरोध किया और “निर्देश प्राप्त करने और मतदाता पहचान पत्र जारी करने के लिए अनिवार्य किए जाने के उद्देश्य को स्पष्ट करने” के लिए स्थगन की मांग की।इस योजना के तहत मिलने वाला लाभ। इस अनुरोध पर ध्यान देते हुए, पीठ ने मामले की सुनवाई के लिए 5 अक्टूबर की तारीख तय की।

