राष्ट्रीय जांच एजेंसी (एनआईए) ने शुक्रवार को हिमाचल प्रदेश के सोलन जिले में नालागढ़ पुलिस स्टेशन के परिसर के पास 1 जनवरी को हुए इम्प्रोवाइज्ड एक्सप्लोसिव डिवाइस (आईईडी) विस्फोट के सिलसिले में तीन आरोपियों को गिरफ्तार किया है। एनआईए के मुताबिक, विस्फोट पुलिस स्टेशन परिसर के अंदर जांच अधिकारी के कमरे से सटी बाहरी दीवार के पास हुआ।
पुलिस स्टेशन के पास एक गली में हुए विस्फोट का असर इतना जबरदस्त था कि आसपास की इमारतों की खिड़कियां टूट गईं, जिनमें 40 मीटर दूर स्थित आर्मी कैंटीन की खिड़कियां भी शामिल थीं। इसकी तेज आवाज 400-500 मीटर दूर तक सुनी गई। विस्फोट के बाद शुरू में नालागढ़ पुलिस स्टेशन में एफआईआर दर्ज की गई थी।
बाद में जांच एनआईए ने अपने हाथ में ले ली और 8 मई, 2026 को भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस), विस्फोटक पदार्थ अधिनियम और गैर-कानूनी गतिविधियां (रोकथाम) अधिनियम (यूएपी एक्ट) की संबंधित धाराओं के तहत मामला फिर से दर्ज किया गया।जांच के दौरान, तीन आरोपियों महावीर कुमार उर्फ काका, अजय मेहरा और मनप्रीत सिंह उर्फ मणि की संलिप्तता सामने आई। इसके बाद एनआईए ने आतंकी हमले के पीछे की बड़ी साजिश का पता लगाने की अपनी कोशिशों के तहत तीनों आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया।
एजेंसी ने कहा कि जांच अपने हाथ में लेने के बाद से इस मामले में ये पहली तीन गिरफ्तारियां हैं। आरोपियों को शिमला में विशेष एनआईए कोर्ट के सामने पेश किया गया, जिसने महावीर कुमार और अजय मेहरा को आठ दिन की पुलिस हिरासत में भेज दिया जबकि मनप्रीत सिंह को न्यायिक हिरासत में भेज दिया गया।
एनआईए ने कहा कि साजिश में शामिल अन्य लोगों की पहचान करने और उन्हें पकड़ने तथा हमले के पीछे के बड़े नेटवर्क का पता लगाने के लिए आगे की जांच जारी है। अधिकारियों ने कहा कि साजिश के पूरे दायरे का पता लगाने और आईईडी विस्फोट की योजना बनाने और उसे अंजाम देने में शामिल रहे अन्य संदिग्धों की भूमिका का पता लगाने की कोशिशें जारी हैं।

