वक्फ (संशोधन) विधेयक पर विचार के लिए गठित संयुक्त संसदीय समिति (जेपीसी) की रिपोर्ट गुरुवार को राज्यसभा में पेश की गई। रिपोर्ट के प्रस्तुत होते ही सदन में जोरदार हंगामा हुआ। भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के प्रवक्ता नलिन कोहली ने इस व्यवहार पर आपत्ति जताते हुए कहा विपक्ष बाधा डालने की राजनीति कर रहा है।
उन्होंने कहा कि संसद की एक प्रक्रिया होती है, जिसके तहत विधेयकों पर चर्चा की जाती है और उसके बाद ही कानून पारित होते हैं। लेकिन विपक्ष लगातार ऐसे अवसर ढूंढता रहता है जिससे संसद की कार्यवाही बाधित की जा सके। यदि किसी को विधेयक में कोई आपत्ति है या संशोधन प्रस्तावित करना है, तो इसके लिए संसदीय प्रक्रिया मौजूद है, लेकिन विपक्ष बहस करने के बजाय सदन की कार्यवाही बाधित करने में लगा हुआ है।
उन्होंने सवाल पूछा, “यदि हर विषय पर हंगामा और बहिष्कार होगा तो क्या संसद सुचारू रूप से चल पाएगी? लोकतंत्र में संवाद आवश्यक है, लेकिन विपक्ष सिर्फ बाधा डालने की राजनीति कर रहा है।”
इसके बाद कांग्रेस नेता बीवी श्रीनिवास के राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) के नए मुख्यालय को ‘शीश महल’ बताने वाले बयान पर कहा कि कांग्रेस के पास अब कोई ठोस राजनीतिक मुद्दा नहीं बचा है, इसलिए वह ऐसे निराधार विषयों को तूल देने की कोशिश कर रही है।
उन्होंने कहा कि कांग्रेस दिल्ली की राजनीति में लगातार कमजोर हो रही है और जनता भी उनके उठाए गए मुद्दों को गंभीरता से नहीं ले रही है।
नलिन कोहली ने कांग्रेस के आरोपों को सिरे से खारिज करते हुए कहा कि आरएसएस का नया भवन संतों के श्रमदान से बना है, जबकि शीश महल सरकारी धन के दुरुपयोग का उदाहरण है। उन्होंने तंज कसा कि कांग्रेस अब इस स्तर तक गिर गई है कि वह किसी भी चीज को मुद्दा बनाने की कोशिश कर रही है। उन्होंने सवाल उठाया कि कांग्रेस एक ऐतिहासिक इमारत और एक सामाजिक संगठन के कार्यालय की तुलना कैसे कर सकती है? उन्होंने कहा कि कांग्रेस के ऐसे बयानों से जनता हंसेगी और यह साफ हो जाएगा कि पार्टी कितनी कमजोर स्थिति में पहुंच चुकी है।
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