पंजाब सरकार ने बकाया करों के एकमुश्त निपटान योजना की समय सीमा 31 मार्च तक बढ़ा दी है, जिससे व्यापारियों और उद्योग जगत को राहत मिलेगी। वित्त मंत्री हरपाल चीमा ने गुरुवार को यह जानकारी दी। 1 अक्टूबर को शुरू की गई यह योजना पहले 31 दिसंबर को समाप्त होने वाली थी।
चीमा ने कहा कि करदाताओं द्वारा सामना किए जा रहे भारी अनुपालन दबाव और व्यावहारिक कठिनाइयों का हवाला देते हुए पंजाब जीएसटी प्रैक्टिशनर्स एसोसिएशन सहित विभिन्न हितधारकों के अभ्यावेदनों के बाद विस्तार को मंजूरी दी गई। उन्होंने कहा कि अब तक एकमुश्त निपटान (ओटीएस) योजना के तहत 6,348 आवेदन प्राप्त हुए हैं, जो व्यापार समुदाय की मजबूत भागीदारी को दर्शाता है।
सरकार ने कहा कि 2025 के अंत में कर जमा करने की समय-सीमाओं के ओवरलैप होने और वैट आकलन आदेशों की सेवा में देरी के कारण कई व्यवसायों के लिए मूल समय-सीमा के भीतर अपनी सटीक देनदारियों का आकलन करना मुश्किल हो गया था। ओटीएस योजना का उद्देश्य जीएसटी से पहले के वैट और केंद्रीय बिक्री कर कानूनों के तहत विवादों को पर्याप्त राहत प्रदान करके हल करना है, जिसमें मामले के आधार पर ब्याज और जुर्माने की 100 प्रतिशत तक की छूट और मूल कर राशि में महत्वपूर्ण कमी शामिल है।
चीमा ने कहा कि यह विस्तार अनुपालन को आसान बनाने और व्यापार-अनुकूल वातावरण को बढ़ावा देने के लिए सरकार की प्रतिबद्धता को दर्शाता है। उन्होंने पात्र व्यापारियों, औद्योगिक इकाइयों और चावल मिल मालिकों से इस योजना का लाभ उठाने और लंबे समय से लंबित बकाया का भुगतान करने का आग्रह किया।
मंत्री ने यह भी चेतावनी दी कि 31 मार्च के बाद योजना का लाभ न उठाने वाले डिफाल्टरों के खिलाफ सख्त वसूली कार्यवाही शुरू की जाएगी।

