N1Live National आरएसएस 100 साल से लाठी रखता आया है, आज भी स्वयंसेवक करते हैं इस्तेमाल: चालवादी नारायणस्वामी
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आरएसएस 100 साल से लाठी रखता आया है, आज भी स्वयंसेवक करते हैं इस्तेमाल: चालवादी नारायणस्वामी

कर्नाटक विधान परिषद में नेता प्रतिपक्ष और वरिष्ठ भाजपा नेता चालवादी नारायणस्वामी ने मंगलवार को कहा कि राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) को अस्तित्व में आए 100 साल हो चुके हैं और संघ के स्वयंसेवक पहले भी लाठी रखते थे और आज भी रखते हैं। उन्होंने कहा कि लाठी का इस्तेमाल शारीरिक व्यायाम और प्रशिक्षण जैसी गतिविधियों के लिए किया जाता है।

मैसूरु में एक प्रेस कॉन्फ्रेंस को संबोधित करते हुए नारायणस्वामी ने गृह मंत्री प्रियंक खरगे की हालिया टिप्पणी पर प्रतिक्रिया दी, जिसमें उन्होंने आरएसएस स्वयंसेवकों के लाठी रखने और हाफ पैंट पहनने का जिक्र किया था। नारायणस्वामी ने कहा, “आरएसएस की स्थापना को 100 साल हो चुके हैं। उस समय भी लाठी थी और आज भी है। आरएसएस के स्वयंसेवक किसी और वजह से लाठी नहीं रखते। वे सुबह शारीरिक व्यायाम करते हैं और कई तरह की चीजें सीखते हैं।”

भाजपा नेता ने प्रियंक खरगे पर निशाना साधते हुए कहा कि राज्य के गृह मंत्री लगातार नागपुर, आरएसएस, लाठी और हाफ पैंट की बात करते रहते हैं। उन्होंने कहा, “राज्य में एक और मंत्री हैं, गृह मंत्री। हाल के दिनों में वह घर से बाहर नहीं निकल रहे हैं। मैं उनके अच्छे स्वास्थ्य की कामना करता हूं, लेकिन वह हमेशा नागपुर, आरएसएस, लाठी और हाफ पैंट की बात करते हैं। बस यही सब है।”

नारायणस्वामी ने तंज कसते हुए कहा, “मैंने उनसे कहा है कि दूसरों की हाफ पैंट देखने के बजाय अपनी हाफ पैंट देखें। इसके बावजूद वह मान नहीं रहे हैं और हाफ पैंट में ही रुचि रखते हैं।” भाजपा नेता ने ऐतिहासिक मैसूरु दशहरा समारोह की तैयारियों में 22 मंत्रियों को शामिल किए जाने के राज्य सरकार के फैसले पर भी सवाल उठाया। उन्होंने शहरी विकास मंत्री और मैसूरु के जिला प्रभारी मंत्री यतींद्र सिद्धारमैया की भूमिका और अधिकार पर भी सवाल उठाए।

उन्होंने कहा, “यतींद्र सिद्धारमैया के पास क्या अधिकार है? ऐसा लगता है कि उनके पास अपने घर के कामकाज को संभालने का भी समय नहीं है। दूसरे मंत्रियों को भी जिम्मेदारी दी गई है और यतींद्र उनसे छोटे हैं। उन्हें घर पर रहकर वहां की व्यवस्था देखनी चाहिए।” नारायणस्वामी ने दशहरा समारोह की तैयारियों में बड़ी संख्या में मंत्रियों को शामिल किए जाने का मजाक उड़ाते हुए पूछा कि इस तरह की व्यवस्था की जरूरत क्यों पड़ी।

गौरतलब है कि यतींद्र सिद्धारमैया मैसूरु जिले के प्रभारी मंत्री हैं। इससे पहले मैसूरु दशहरा समारोह की तैयारियों की पूरी जिम्मेदारी जिला प्रभारी मंत्री को ही दी जाती थी। यतींद्र सिद्धारमैया पूर्व मुख्यमंत्री सिद्धारमैया के बेटे हैं।

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