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‘घर की खामोशी भी देती है सुकून’, सिद्धांत गुप्ता ने बताया जम्मू से दिल का कनेक्शन

'The silence of home also brings peace', Siddhant Gupta shares his heart's connection to Jammu

17 अप्रैल । आज के समय में हर कोई अपने काम और सपनों को पूरा करने के लिए अपनी जड़ों से दूर होता जा रहा है। खासकर फिल्म और मनोरंजन की दुनिया में कलाकारों के लिए यह दूरी और भी ज्यादा महसूस होती है। इसी एहसास को लेकर अभिनेता सिद्धांत गुप्ता ने अपने विचार साझा किए। उन्होंने अपने होमटाउन जम्मू में बिताए पलों को याद किया।

सिद्धांत गुप्ता ने कहा, ”जम्मू में मेरा बचपन बहुत ही साधारण लेकिन खुशियों से भरा गुजरा था। उस समय सोशल मीडिया जैसी चीजें नहीं थीं, इसलिए हर समय खेल-कूद और छोटे-छोटे क्रिएटिव कामों में बीतता था। मैं अपने भाई के साथ अखबार से रॉकेट बनाकर खेलता था। ये यादें आज भी मेरे दिल के बेहद करीब हैं। इन यादों में एक सादगी है, जो आज की भागदौड़ भरी जिंदगी में कहीं खो सी गई है।”

उन्होंने कहा, “मैं साल में कम से कम दो बार जम्मू जरूर जाता हूं, खासतौर पर दिवाली के समय। एक कलाकार के तौर पर हर नए किरदार के साथ मेरी सोच और नजरिया बदलता रहता है, लेकिन जब मैं अपने घर लौटता हूं, तो मुझे खुद को फिर से समझने का मौका मिलता है। जम्मू मेरे लिए सिर्फ एक जगह नहीं बल्कि पहचान का अहम हिस्सा है।”

अपने अनुभव साझा करते हुए उन्होंने कहा, ”जम्मू में बिताया गया समय मेरे लिए बेहद खास होता है। वहां परिवार के साथ बैठकर हंसना, पुरानी बातें करना, कभी-कभी विचारों में मतभेद होना, हल्की-फुल्की नोकझोंक और यहां तक कि बिना किसी खास बात के बातचीत करना भी मुझे सुकून देता है। जब कहने के लिए कुछ नहीं बचता, तब भी वहां का सन्नाटा मुझे अच्छा लगता है। यह सन्नाटा मेरे लिए खालीपन नहीं बल्कि एक ऐसा एहसास है जो मुझे भीतर से मजबूत करता है।”

सिद्धांत ने अपनी प्रोफेशनल लाइफ के बारे में भी खुलकर बात की। उन्होंने कहा, ”इस इंडस्ट्री में लगातार काम करना और खुद को हर समय साबित करना आसान नहीं होता। यह एक ऐसी दौड़ है, जिसमें इंसान कई बार अकेला महसूस करता है। ऐसे में अपने घर और परिवार के पास जाना मेरे लिए किसी फ्यूल की तरह काम करता है। यही वजह है कि मैं अपने बिजी शेड्यूल के बावजूद अपने होमटाउन जाने का समय जरूर निकालता हूं।”

सिद्धांत गुप्ता ने कहा, ”समय बहुत तेजी से निकल जाता है और हमें इसका एहसास भी नहीं होता। इसलिए जरूरी है कि हम अपने लोगों के साथ समय बिताएं और अपने रिश्तों को मजबूत बनाए रखें। हर इंसान अंदर से भावुक होता है और अपनेपन की यह भावना ही उसे आगे बढ़ने की ताकत देती है। सिनेमा हमेशा रहेगा, लेकिन अपनी जड़ों से जुड़ाव ही इंसान को असली मायनों में मजबूत बनाता है।”

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