हिमाचल प्रदेश-उत्तराखंड सीमा पर शुक्रवार को तनाव कम हो गया, जब पुलिस से झड़प करने और उत्तराखंड में जबरन घुसने वाले निहंग जत्थे ने संबंधित अधिकारियों से बातचीत के बाद वापस लौटना शुरू कर दिया। देहरादून के रेस कोर्स गुरुद्वारे तक पहुंचे इस समूह ने पुलिस सुरक्षा में सुबह करीब 3:30 बजे प्रस्थान किया और गुरुद्वारा पांवटा साहिब लौट आया।
पीछे हटने के बावजूद विवाद अनसुलझा ही रहा। पौंटा साहिब में हुई वार्ता का नया दौर निहंग प्रतिनिधियों द्वारा उत्तराखंड प्रशासन को दो दिन का अल्टीमेटम देने के साथ समाप्त हुआ। उन्होंने कर्णप्रयाग घटना में गिरफ्तार चार निहंगों की जमानत, उनके खिलाफ शिकायत दर्ज कराने वाले स्थानीय निवासियों के खिलाफ कार्रवाई और झड़प में शामिल पुलिस अधिकारियों की बर्खास्तगी की मांग की। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि उनकी मांगें पूरी नहीं हुईं तो वे उत्तराखंड की ओर एक और मार्च निकालेंगे।
देहरादून के वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक (एसएसपी) नवनीत भुल्लर, पुलिस अधीक्षक पंकज घरोला, अतिरिक्त जिला मजिस्ट्रेट और विकासनगर के उप-मंडल मजिस्ट्रेट विनोद कुमार बैठक में उपस्थित थे।
निहंगों ने जोर देकर कहा कि वे तब तक पौंटा साहिब में ही रहेंगे जब तक कि हिरासत में लिए गए युवकों को रिहा नहीं कर दिया जाता, और उन्होंने यह भी कहा कि वे पंजाब लौटने से पहले हेमकुंड साहिब जाना चाहते हैं।
शुरुआत में चारों तीर्थयात्रियों के खिलाफ एकतरफा एफआईआर दर्ज की गई थी। पुलिस महानिरीक्षक राजीव स्वरूप ने निष्पक्ष और पारदर्शी जांच का आश्वासन दिया। जांच को चमोली से हरिद्वार स्थानांतरित कर दिया गया है और डीआईजी यशवंत सिंह इसकी देखरेख कर रहे हैं। एसएसपी भुल्लर स्वयं इसकी निगरानी कर रहे हैं। स्वरूप ने इस बात पर जोर दिया कि हेमकुंड साहिब यात्रा एक पवित्र तीर्थयात्रा है और इसकी सुरक्षा सर्वोपरि है।

