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राम मंदिर चढ़ावा चोरी मामले पर ट्रस्ट ने दी सफाई, बैंक व्यवस्था को बताया जिम्मेदार

The trust gave a clarification on the case of theft of Ram temple offerings, said the bank system was responsible

अयोध्या स्थित राम मंदिर से जुड़े कथित चढ़ावा चोरी मामले को लेकर लगातार नए खुलासे सामने आ रहे हैं। इस पूरे विवाद के बीच अब श्रीराम जन्मभूमि तीर्थक्षेत्र ट्रस्ट ने सफाई देते हुए कई अहम बातें कही हैं। ट्रस्ट के कार्यालय प्रभारी प्रकाश गुप्ता ने कहा कि दान की रकम की गिनती ट्रस्ट के कर्मचारियों द्वारा नहीं बल्कि बैंक की ओर से नियुक्त आउटसोर्स एजेंसी के माध्यम से की जाती थी। ऐसे में यदि किसी तरह की गड़बड़ी हुई है, तो उसकी जिम्मेदारी ट्रस्ट की नहीं बल्कि बैंक और उसकी व्यवस्था की बनती है।

प्रकाश गुप्ता ने आईएएनएस से बातचीत के दौरान कहा कि ट्रस्ट और भारतीय स्टेट बैंक (एसबीआई) के बीच इस काम को लेकर एक औपचारिक समझौता था। इस समझौते के तहत बैंक अपनी टीम या उससे जुड़ी एजेंसी के कर्मचारियों को काउंटिंग के लिए भेजता था। उन्होंने कहा कि ट्रस्ट की ओर से केवल एक प्रतिनिधि वहां मौजूद रहता था, जिसका काम केवल निगरानी करना होता था, न कि गिनती या कैश हैंडलिंग में सीधे शामिल होना। ऐसे में यदि किसी प्रकार की अनियमितता सामने आई है, तो वह बैंक की प्रक्रिया से जुड़ा मामला है, न कि ट्रस्ट के संचालन से।

उन्होंने यह भी कहा कि अब जिन लोगों पर आरोप लगाए जा रहे हैं, वे सभी काउंटिंग प्रक्रिया में शामिल थे लेकिन इसका यह अर्थ नहीं है कि ट्रस्ट के भीतर किसी तरह की मिलीभगत थी। उनके अनुसार, कई बार बिना ठोस आधार के भी आरोप लगाए जाते हैं, खासकर तब जब कोई संगठन या संस्था बड़े धार्मिक या सार्वजनिक कार्यों से जुड़ी हो। उन्होंने आरोप लगाने वालों पर सवाल उठाते हुए कहा कि जो लोग पहले से ही ट्रस्ट के विरोध में रहे हैं, वे इस तरह के मामलों को बढ़ा-चढ़ाकर पेश कर रहे हैं।

प्रकाश गुप्ता ने कहा कि जांच का दायरा बढ़ना अपने आप में अच्छी बात है क्योंकि इससे पूरी सच्चाई सामने आ सकेगी। उन्होंने कहा कि जांच एजेंसियों को यह तय करना होगा कि वे किस समय से जांच शुरू करें, क्या यह जांच ट्रस्ट के गठन से शुरू होगी या किसी विशेष अवधि से। यह पूरी तरह जांच एजेंसी यानी एसआईटी पर निर्भर करता है कि वह किस दिशा में जांच को आगे बढ़ाती है।

उन्होंने यह भी दोहराया कि ट्रस्ट का इस मामले में किसी तरह का सीधा संबंध नहीं है। उनके अनुसार, बैंक द्वारा नियुक्त कर्मचारी और आउटसोर्स एजेंसी के लोग ही नकदी की गिनती और जमा करने का काम करते थे। ऐसे में यदि किसी स्तर पर गड़बड़ी हुई है, तो उसकी जिम्मेदारी उन्हीं व्यवस्थाओं की होगी। ट्रस्ट के पास न तो उन कर्मचारियों के चयन का अधिकार था और न ही उनके सत्यापन की जिम्मेदारी।

इस पूरे मामले में जिन आठ लोगों को आरोपी बनाया गया है, उनके बारे में भी प्रकाश गुप्ता ने कहा कि इनमें से कुछ लोग केवल परिसर के भीतर व्यवस्था संभालने का काम करते थे। उन्होंने कहा कि आरोपी टिन्नू यादव को परिसर की देखरेख और वीआईपी दर्शन जैसी व्यवस्थाओं की जिम्मेदारी दी गई थी क्योंकि वहां बड़ी संख्या में श्रद्धालु और विशिष्ट अतिथि आते रहते हैं। ऐसे में हर किसी को परिसर में स्वतंत्र रूप से प्रवेश की अनुमति नहीं होती थी।

प्रकाश गुप्ता ने कहा कि जांच सही दिशा में होनी चाहिए। उन्होंने उम्मीद जताई कि जांच निष्पक्ष होगी और यदि कोई दोषी पाया जाता है तो उसे कानून के अनुसार सजा मिलनी चाहिए। साथ ही, यह भी सुनिश्चित होना चाहिए कि किसी निर्दोष को अनावश्यक रूप से फंसाया न जाए।

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