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थिएटर और ‘नुक्कड़’ ने बदली पवन मल्होत्रा की किस्मत, रास नहीं आया फैमिली बिजनेस

Theatre and street plays changed Pawan Malhotra's fortunes; the family business didn't suit him.

पवन मल्होत्रा आज भारतीय अभिनय जगत के उन कलाकारों में गिने जाते हैं, जिन्होंने दमदार अभिनय से दर्शकों के दिलों में खास जगह बनाई है। उनका यह सफर आसान नहीं था। उनके जीवन में एक ऐसा मोड़ भी आया जब परिवार की उम्मीदें और सपनों के बीच किसी एक को चुनना था। उनके पिता चाहते थे कि वह फैमिली बिजनेस संभालें, जबकि पवन का मन अभिनय की दुनिया में बसा था।

पवन मल्होत्रा का जन्म 2 जुलाई 1958 को दिल्ली में हुआ था। उन्होंने दिल्ली विश्वविद्यालय से ग्रेजुएशन की पढ़ाई की। एक बार वह दोस्तों के साथ थिएटर देखने गए थे और वहीं से उनके अंदर अभिनय के प्रति रुचि जागी। धीरे-धीरे यह रुचि जुनून में बदल गई और वह खुद मंच पर अभिनय करने लगे।

हालांकि उनके घर का माहौल अलग था। उनके पिता चाहते थे कि बेटा फैमिली बिजनेस संभाले। परिवार की जिम्मेदारी को देखते हुए पवन ने अपने पिता की बात मानने की कोशिश की और बिजनेस की तरफ कदम बढ़ाया, लेकिन उनका मन वहां नहीं लगा। वह हमेशा अभिनय से जुड़े रहे। इस दौरान वह थिएटर में भी काम करते रहे।

एक दिन उन्हें टीवी की दुनिया से पहला बड़ा मौका मिला और वह 1986 में दूरदर्शन के मशहूर धारावाहिक ‘नुक्कड़’ में नजर आए। इस शो में उन्होंने सईद का किरदार निभाया, जो दर्शकों के बीच काफी लोकप्रिय हुआ। लोगों से प्यार मिलता देख उनके पिता की सोच भी धीरे-धीरे बदलने लगी। जब ‘नुक्कड़’ की लोकप्रियता बढ़ी और लोग उनके पिता के ऑफिस के बाहर पवन को देखने आने लगे, तब उनके पिता को एहसास हुआ कि उनका बेटा जिस राह पर चला है, वह सही है।

इसके बाद उन्होंने टीवी के कई अन्य सीरियल्स में भी काम किया और अपनी पहचान मजबूत की। उनका असली सफर फिल्मों से शुरू हुआ। 1984 में फिल्म ‘अब आएगा मजा’ से उन्होंने बॉलीवुड में कदम रखा। शुरुआत में उन्हें छोटे रोल मिले, लेकिन उन्होंने हर किरदार को बेहतरीन तरीके से निभाया। 1985 की ‘खामोश’ और 1989 की ‘बाघ बहादुर’ जैसी फिल्मों ने उन्हें एक मजबूत अभिनेता के रूप में स्थापित किया। इन फिल्मों में उनके काम को राष्ट्रीय स्तर पर सराहना भी मिली।

समय के साथ पवन मल्होत्रा ने अलग-अलग तरह के किरदार निभाए। उन्होंने कभी पुलिस अधिकारी का रोल किया, कभी आम इंसान की भूमिका निभाई और कभी निगेटिव किरदारों से भी दर्शकों को प्रभावित किया। ‘ब्लैक फ्राइडे’, ‘जब वी मेट’, ‘डॉन’, ‘भाग मिल्खा भाग’ और ‘रूस्तम’ जैसी फिल्मों में उनका अभिनय काफी सराहा गया। उनकी खासियत है कि वह हर किरदार में पूरी तरह ढल जाते हैं।

पवन मल्होत्रा ने ओटीटी प्लेटफॉर्म पर भी किस्मत आजमाई। वेब सीरीज ‘ग्रहण’ में उनके शांत लेकिन असरदार अभिनय को काफी पसंद किया गया।

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