कांगड़ा जिले में आवास के लिए भूमि आवंटन हेतु कुल 2,802 आवेदन लंबित हैं, जबकि जांच के बाद 1,840 आवेदन खारिज कर दिए गए हैं। पिछले कुछ वर्षों में राजस्व विभाग को प्राप्त 5,120 आवेदनों में से अब तक केवल 478 पात्र लाभार्थियों को ही घर निर्माण हेतु भूमि आवंटित की गई है।
राज्य सरकार के पास भूमिहीन परिवारों को आवास के लिए छोटे भूखंड उपलब्ध कराने का प्रावधान है। इस योजना के तहत, ग्रामीण क्षेत्रों में 3 बिस्वा और शहरी क्षेत्रों में 2 बिस्वा भूमि आवंटित की जाती है ताकि योग्य गरीब परिवार अपने घर बना सकें। हालांकि, कांगड़ा में आवेदनों की प्रक्रिया धीमी रही है, जिसके परिणामस्वरूप काफी संख्या में आवेदन लंबित हैं।
उपायुक्त हेमराज बैरवा ने कहा कि प्रशासन ने देरी का गंभीर संज्ञान लिया है और सभी एसडीएम को निर्देश दिया है कि वे तीन महीने के भीतर 2,802 लंबित मामलों की जांच पूरी करें। उन्होंने कहा कि आवेदकों के भौतिक सत्यापन के बाद एक व्यापक, समयबद्ध रिपोर्ट तैयार की जाएगी। इसके बाद आवंटन संबंधी अंतिम निर्णय इन निष्कर्षों के आधार पर और सरकारी भूमि की उपलब्धता के अनुसार लिया जाएगा।
अधिकारियों का कहना है कि देरी का मुख्य कारण लंबी सत्यापन प्रक्रिया है। आवेदकों को कई विभागों से अनापत्ति प्रमाण पत्र (एनओसी) प्राप्त करना आवश्यक है, जिससे अक्सर प्रक्रियात्मक बाधाएं और लंबित मामलों की लंबी प्रक्रिया उत्पन्न होती है। कई कार्यालयों में जाने की आवश्यकता ने लाभार्थियों के लिए प्रक्रिया को और धीमा कर दिया है।
इन समस्याओं के समाधान के लिए जिला प्रशासन ने “मिशन मोड” दृष्टिकोण अपनाने का निर्णय लिया है। सभी 18 उपमंडलों के एसडीएम को संबंधित विभागों के साथ समन्वय स्थापित करने और सत्यापन एवं एनओसी मंजूरी उसी दिन देने का निर्देश दिया गया है। आवेदकों को अलग-अलग कार्यालयों में जाने के बजाय, पात्र लाभार्थियों को संयुक्त बैठकों में आमंत्रित किया जाएगा, जहां उनके मामलों की सामूहिक रूप से जांच की जाएगी और एनओसी से संबंधित लंबित मामलों का एक ही स्थान पर समाधान किया जाएगा। लंबित आवेदनों की व्यवस्थित समीक्षा और निपटान के लिए प्रत्येक उपमंडल में हर महीने के पहले सप्ताह में ऐसी बैठकें आयोजित की जाएंगी।
हाल ही में आयुष, युवा सेवा एवं खेल एवं विधि मंत्री यादवेंद्र गोमा ने धर्मशाला में भूखंड आवंटन की स्थिति की समीक्षा की। उन्होंने अधिकारियों को प्रक्रिया में तेजी लाने और पात्र भूमिहीन परिवारों को प्राथमिकता देने का निर्देश दिया। उन्होंने कहा कि लंबित मामलों का निपटारा मई के अंत तक कर दिया जाना चाहिए ताकि कोई भी जरूरतमंद परिवार आवास से वंचित न रह जाए। उन्होंने कहा कि समय पर आवंटन से स्थायी घर की तलाश कर रहे सैकड़ों परिवारों को लंबे समय से प्रतीक्षित राहत मिलेगी।

