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भारतीय खाने के पीछे है विज्ञान, वेदों और हकीमों ने गढ़ा भारतीय खानपान: कुणाल कपूर

There is science behind Indian food, Vedas and Hakims shaped Indian cuisine: Kunal Kapoor

10 मार्च । भारतीय खानपान पूरी दुनिया में अपने अनोखे स्वाद और मसालों की खुशबू के लिए जाना जाता है। अलग-अलग राज्यों, मौसम और संस्कृतियों के कारण यहां के खाने में कई तरह की विविधता देखने को मिलती है। इस कड़ी में मशहूर सेलिब्रिटी शेफ कुणाल कपूर ने भारतीय खाने की इसी खासियत के बारे में बात की और बताया कि भारत की रसोई समय के साथ कैसे विकसित हुई है।

शेफ कुणाल कपूर ने आईएएनएस से बात करते हुए कहा, ”हर देश में खाने की शुरुआत और विकास का तरीका अलग होता है। भारतीय खाने की खासियत यह है कि इसमें मसालों का इस्तेमाल बहुत सोच-समझकर किया जाता है और इसके पीछे एक वैज्ञानिक सोच भी होती है।”

कुणाल कपूर ने कहा, ”भारतीय भोजन में इस्तेमाल होने वाले मसालों की परंपरा बहुत पुरानी है। हमारे खाने की दिशा और रूप को सदियों पहले वेदों और हकीमों ने गढ़ा था। पुराने समय में आयुर्वेद और पारंपरिक चिकित्सा से जुड़े विद्वान यह समझते थे कि कौन-कौन से मसाले शरीर के लिए फायदेमंद हैं। इसी आधार पर लोगों ने अपने भोजन में मसालों का इस्तेमाल करना शुरू किया।”

उन्होंने एक साधारण उदाहरण देते हुए कहा, ”भारत में एक कप चाय में भी कई तरह के मसाले डाले जा सकते हैं। कभी-कभी चाय में छह या सात मसाले तक मिलाए जाते हैं। यह सिर्फ स्वाद के लिए नहीं होता, बल्कि इसके पीछे स्वास्थ्य से जुड़ी सोच भी होती है। इन मसालों में ऐसे गुण होते हैं जो शरीर के लिए फायदेमंद माने जाते हैं।”

कुणाल कपूर ने कहा, ”अगर इन मसालों को सीधे पीसकर किसी को खाने या पीने के लिए दे दिया जाए, तो उनका स्वाद बहुत तेज और कड़वा लग सकता है। इसलिए लोगों ने इन्हें खाने में मिलाने का तरीका खोजा। उदाहरण के तौर पर कई मसालों को मिलाकर गरम मसाला बनाया जाता है। जब इसे खाने में डाला जाता है, तो भोजन का स्वाद बढ़ जाता है और शरीर को भी फायदा मिलता है।”

उन्होंने कहा, ”भारतीय भोजन समय के साथ लगातार बदलता और विकसित होता रहा है। अलग-अलग इलाकों में जो चीजें आसानी से उपलब्ध थीं, उन्हें वहां के खाने का हिस्सा बना लिया गया। इसके अलावा, मौसम और लोगों के शरीर की जरूरतों के हिसाब से भी भोजन में बदलाव किए गए। इसी कारण भारत के अलग-अलग राज्यों में खाने का स्वाद और तरीका अलग-अलग दिखाई देता है।”

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