पंजाब सरकार ने यूरिया की हेराफेरी से जुड़े एक घोटाले में दो उर्वरक कंपनियों और तीन वरिष्ठ अधिकारियों के खिलाफ तीन पुलिस मामले दर्ज कराए हैं। ये मामले राज्य के कृषि विभाग की शिकायत पर दर्ज किए गए हैं, जब एक जांच में पता चला कि किसानों के लिए निर्धारित सब्सिडी वाले यूरिया का औद्योगिक उपयोग के लिए दुरुपयोग किया जा रहा था।
जांच में पता चला कि कंपनियों ने बैगों पर दोबारा लेबल लगाकर मार्कफेड और मिल्कफेड के पशु आहार संयंत्रों को नीम लेपित कृषि यूरिया की आपूर्ति की थी। इस हेराफेरी का पता इसलिए चला क्योंकि कृषि यूरिया नीम लेपित होता है, जबकि उद्योग में इस्तेमाल होने वाला तकनीकी यूरिया नीम लेपित नहीं होता। सब्सिडी वाले कृषि यूरिया और औद्योगिक यूरिया की कीमत में काफी अंतर है।
जून में मामला सामने आने के बाद मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान ने जांच के आदेश दिए। सात अधिकारियों के खिलाफ आरोप पत्र भी दाखिल किए गए हैं। सहकारी समितियों और संबंधित कंपनियों के अधिकारियों के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता, आवश्यक वस्तु अधिनियम और उर्वरक अधिनियम की धाराओं के तहत बटाला, कपूरथला और खन्ना में एफआईआर दर्ज की गई हैं।
संयुक्त किसान मोर्चा से संबद्ध किसान संघों द्वारा इस मुद्दे को उठाए जाने के बाद यह घोटाला सामने आया। बाद में की गई छापेमारी में यूरिया की हेराफेरी की पुष्टि हुई।

