कुरुक्षेत्र विश्वविद्यालय के युवा एवं सांस्कृतिक कार्य विभाग द्वारा आयोजित तीन दिवसीय साहित्यिक एवं ललित कला कार्यशाला शनिवार को शुरू हुई।
कुरुक्षेत्र विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. सोमनाथ सचदेवा ने कहा कि इस तरह की कार्यशालाएँ युवा पीढ़ी में साहित्य और कला के प्रति गहरा प्रेम जगाती हैं, रचनात्मक सोच को पोषित करती हैं और भारत की समृद्ध सांस्कृतिक परंपराओं को मज़बूत बनाती हैं। उन्होंने युवाओं से अपने लक्ष्यों को प्राप्त करने के लिए लगन और दृढ़ संकल्प के साथ काम करने का आह्वान किया।
राष्ट्र निर्माण में युवाओं की महत्वपूर्ण भूमिका पर प्रकाश डालते हुए सचदेवा ने इस बात पर जोर दिया कि उनके विचार, रचनात्मकता और ऊर्जा एक मजबूत और प्रगतिशील भारत की नींव रखते हैं।
उन्होंने आगे कहा, “स्वदेशी केवल एक विचार नहीं है, बल्कि स्वाभिमान और राष्ट्रीय गौरव की भावना है। अगर हर नागरिक अपने दैनिक जीवन में स्वदेशी उत्पादों को प्राथमिकता दे, तो भारत आर्थिक रूप से एक अग्रणी देश के रूप में उभरेगा।”

