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मुंबई में भारी बारिश से तीन मंजिला चॉल ढहा, पांच बच्चों सहित छह की मौत, सीएम ने जताया दुख

Three-storey chawl collapses due to heavy rain in Mumbai; six dead, including five children; CM expresses grief.

मुंबई में लगातार हो रही बारिश के कारण जनजीवन अस्त-व्यस्त हो गया है। रविवार को मानखुर्द के जनता नगर इलाके में एक तीन मंजिला चॉल ढह गई, जिससे पांच बच्चों और एक महिला समेत छह लोगों की मौत हो गई। इस हादसे पर मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने गहरा दुख व्यक्त किया है।

सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ पर मुख्यमंत्री कार्यालय (सीएमओ) की ओर से जारी पोस्ट में लिखा गया, ” मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने मुंबई के मानखुर्द इलाके में घर गिरने की घटना में 6 लोगों की मौत पर गहरा दुख जताया है और मृतकों को श्रद्धांजलि दी है। इस मौके पर उन्होंने कहा कि हम उनके परिवारों के दुख में शामिल हैं और उन्होंने मृतकों के परिजनों को 5 लाख रुपये की आर्थिक सहायता देने की घोषणा की है।”

मुंबई के मेयर ऑफिस से मिली जानकारी के मुताबिक, मानखुर्द के जनता नगर इलाके में तीन मंजिला चॉल के ढहने से पांच बच्चों और एक महिला समेत छह लोगों की मौत हो गई। एक व्यक्ति घायल हो गया और उसे अस्पताल में भर्ती कराया गया। एनडीआरएफ, फायर ब्रिगेड, पुलिस और बीएमसी की बचाव टीमों ने बचाव कार्य किया। मुंबई की मेयर रितु तावड़े ने प्रभावित परिवारों से मिलने के लिए गोवंडी अस्पताल का दौरा किया।

महाराष्ट्र के जल संसाधन मंत्री गिरीश महाजन ने पत्रकारों से बातचीत में कहा कि मुंबई में भारी बारिश के कारण मानखुर्द के जनता नगर इलाके में यह इमारत ढह गई। हादसे में छह लोगों की मौत हुई है। एनडीआरएफ, पुलिस और अन्य एजेंसियां राहत एवं बचाव कार्य में जुटी हैं। उन्होंने कहा कि इलाके में अवैध निर्माण हुए हैं और इस दुखद घटना की जांच कराई जाएगी।

समाजवादी पार्टी के विधायक अबू आजमी ने कहा कि वर्ष 1995 में तत्कालीन मुख्यमंत्री मनोहर जोशी ने घोषणा की थी कि 1 जनवरी 1995 तक बने सभी झोपड़ियों का पुनर्वास किया जाएगा, जबकि इसके बाद बनने वाले झोपड़ों के लिए जिम्मेदार अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई होगी। उन्होंने सवाल उठाया कि 1995 के बाद भी बड़ी संख्या में झोपड़ियां कैसे बन गईं। उनके अनुसार, इसकी पूरी जिम्मेदारी नगर निगम प्रशासन की है।

अबू आजमी ने आरोप लगाया कि कथित तौर पर पैसे लेकर झोपड़ियां बनने दी जाती हैं। उन्होंने कहा कि यदि सरकार झोपड़ियां हटाना चाहती है तो पहले जिम्मेदार अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई कर उन्हें जेल भेजना चाहिए। उन्होंने कहा कि वह इस मुद्दे को कई बार सदन में उठा चुके हैं। उनकी मांग है कि जर्जर और खतरनाक स्थिति में मौजूद झोपड़ियों को हटाकर वहां रहने वाले लोगों को सुरक्षित वैकल्पिक आवास उपलब्ध कराया जाए।

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