प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) की कार्रवाई और पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी के विरोध प्रदर्शन को लेकर सियासी बयानबाजी तेज हो गई है। केंद्र सरकार के मंत्रियों और भाजपा नेताओं ने साफ शब्दों में कहा है कि ईडी एक स्वतंत्र एजेंसी है और वह कानून के तहत अपना काम कर रही है, इसमें सरकार का कोई हस्तक्षेप नहीं है।
दिल्ली में केंद्रीय मंत्री रामदास अठावले ने आईएएनएस से कहा कि जब भी ईडी किसी मामले में जांच करती है, तो उसके पीछे ठोस दस्तावेज और जानकारी होती है। उन्होंने स्पष्ट किया कि ईडी की जांच का सरकार से कोई लेना-देना नहीं होता। अगर ईडी जांच के लिए आती है, तो उसे सभी जरूरी कागजात देखने और जांच करने का पूरा अधिकार है। कानून के दायरे में रहकर एजेंसियों को अपना काम करने दिया जाना चाहिए।
वहीं, छत्तीसगढ़ की राजधानी रायपुर में मंत्री टंकराम वर्मा ने पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी द्वारा ईडी की कार्रवाई के खिलाफ किए गए विरोध पर प्रतिक्रिया दी।
उन्होंने कहा कि ममता बनर्जी का ईडी के खिलाफ प्रदर्शन करना पूरी तरह गलत है। ईडी अपना संवैधानिक दायित्व निभा रही है और उसे बिना किसी दबाव के काम करने दिया जाना चाहिए। उन्होंने आरोप लगाया कि चल रही जांच में दखल देना और दस्तावेज जब्त करने जैसी कोशिशें गलत हैं। टंकराम वर्मा ने दावा किया कि बंगाल की जनता मौजूदा सरकार से परेशान हो चुकी है और आने वाले समय में लोकतांत्रिक तरीके से इसका करारा जवाब दिया जाएगा।
पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी के आई-पैक कार्यालय पर ईडी की छापेमारी के विरोध में निकाले गए मार्च और दिल्ली में टीएमसी कार्यकर्ताओं के प्रदर्शन को लेकर भाजपा विधायक और पूर्व मंत्री सीपी सिंह ने भी बयान दिया।
उन्होंने कहा कि आज जब ईडी अपना कर्तव्य निभा रही है, तो सभी भ्रष्टाचारियों को परेशानी हो रही है। सीपी सिंह ने कहा कि ममता बनर्जी भी भ्रष्टाचार से अछूती नहीं हैं। उनके मुताबिक, जब ईडी भ्रष्टाचार को उजागर करने और दोषियों पर शिकंजा कसने के लिए कार्रवाई करती है, तो सभी भ्रष्टाचारी एकजुट होकर विरोध शुरू कर देते हैं।
सीपी सिंह ने यह भी कहा कि धरना-प्रदर्शन और विरोध मार्च से ईडी के काम पर कोई असर नहीं पड़ेगा। ईडी अपना कर्तव्य निभाती रहेगी और कानून के मुताबिक कार्रवाई जारी रहेगी।


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