N1Live National आज हमारे युवा साथी धैर्य, आत्मविश्वास और अथक परिश्रम से ऐतिहासिक सफलता हासिल कर रहे: प्रधानमंत्री मोदी
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आज हमारे युवा साथी धैर्य, आत्मविश्वास और अथक परिश्रम से ऐतिहासिक सफलता हासिल कर रहे: प्रधानमंत्री मोदी

Today, our young compatriots are achieving historic success through patience, self-confidence, and tireless hard work: Prime Minister Modi.

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ पर सोमवार को सुभाषित शेयर किया। प्रधानमंत्री की ओर से सोशल मीडिया पर लिखा गया, “आज हमारे युवा साथी धैर्य, आत्मविश्वास और अथक परिश्रम से ऐतिहासिक सफलता हासिल कर रहे हैं। यही विकसित हो रहे भारत की सबसे बड़ी ताकत है।”

पीएम मोदी ने संस्कृत श्लोक, “प्राप्यापदं न व्यथते कदाचिदुद्योगमन्विच्छति चाप्रमत्तः। दुःखं च काले सहते महात्मा धुरन्धरस्तस्य जिताः सपत्नाः॥” भी साझा किया है, जिसका हिंदी अर्थ है कि जो मनुष्य संकट के समय कभी विचलित नहीं होता, बल्कि धैर्य, कुशलता और सावधानी के साथ उससे बाहर निकलने का प्रयास करता है तथा समय आने पर दुखों को भी सहजता से सहन करता है, वह अंतत: कभी पराजित नहीं होता, बल्कि विपरीत परिस्थितियों पर भी विजय प्राप्त करता है।

इससे पहले प्रधानमंत्री ने 17 जुलाई को सुभाषित शेयर करते हुए लिखा था, “आज भारत को पहली हाइड्रोजन ट्रेन मिलने का सपना साकार होने जा रहा है। यह आत्मनिर्भर भारत और सतत विकास की दिशा में एक बहुत बड़ा दिन है। मैं इससे जुड़े सभी लोगों को बहुत बधाई देता हूं।”

पीएम मोदी ने संस्कृत श्लोक, “प्रभूतं कार्यमल्पं वा यन्नरः कर्तुमिच्छति। सर्वारम्भेण तत् कार्यं सिंहादेकं प्रचक्षते।।” भी साझा किया था। जिसका हिंदी अर्थ है कि चाहे कार्य बहुत बड़ा हो या छोटा- जिसे मनुष्य करना चाहता है, उस पूर्ण समर्थन या नए उत्साह के साथ करना चाहिए, यही एक गुण सिंह से सीखने योग्य है।

प्रधानमंत्री की ओर से 16 जुलाई को जगन्नाथ रथ यात्रा को लेकर सोशल मीडिया पर सुभाषित साझा किया गया था। उन्होंने लिखा था, “महाप्रभु जगन्नाथ की रथ यात्रा के पावन अवसर पर मेरी कामना है कि उनका आशीर्वाद हम सभी पर सदैव बना रहे। उनकी दिव्य कृपा से सभी देशवासियों के जीवन में नई ऊर्जा का संचार हो।”

पीएम ने संस्कृत श्लोक, “देवदेव जगन्नाथ सुरासुरनमस्कृत। पुण्यश्लोकाव्ययानन्त परमात्मन्नमोऽस्तु ते॥” शेयर किया था, जिसका हिंदी अर्थ है कि देवताओं के भी देव और संपूर्ण जगत के स्वामी भगवान जगन्नाथ की देवताओं से लेकर समस्त प्राणी श्रद्धापूर्वक उपासना करते हैं। उनका यश पवित्र एवं कल्याणकारी है। वे अविनाशी अनंत तथा समस्त प्राणियों के हृदय में विराजमान परमात्मा हैं। ऐसे भगवान जगन्नाथ को बार-बार नमस्कार है।

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