पंजाब के तीन शीर्ष अधिकारी, पंजाब के अतिरिक्त मुख्य सचिव (गृह) आलोक शेखर, डीजीपी गौरव यादव और जालंधर की पुलिस आयुक्त धनप्रीत कौर, दिल्ली विधानसभा की विशेषाधिकार समिति के समक्ष पेश हुए और अपना पक्ष प्रस्तुत किया।
इस मामले पर बोलते हुए दिल्ली विधानसभा के अध्यक्ष विजेंद्र गुप्ता ने कहा कि समिति वर्तमान में इस मुद्दे की जांच कर रही है और उसकी रिपोर्ट का इंतजार है।
गुप्ता ने आगे कहा, “इस समय यह बताना मुश्किल है कि प्रक्रिया में कितना समय लगेगा। समिति द्वारा अपनी रिपोर्ट को अंतिम रूप देने के बाद, इसे सदन के समक्ष प्रस्तुत किया जाएगा, जिसके बाद सदन समिति की सिफारिशों पर विचार-विमर्श करेगा। इसके बाद अध्यक्ष द्वारा अंतिम निर्णय लिया जाएगा।”
गुप्ता ने इस बात पर जोर दिया कि सदन, उसके अधिकारियों और उसके सदस्यों के विशेषाधिकारों के साथ कोई समझौता नहीं किया जा सकता है।
उन्होंने कहा कि विधानसभा की गरिमा को हर समय बनाए रखना चाहिए, क्योंकि यह भारत की लोकतांत्रिक व्यवस्था और संवैधानिक ढांचे के सार को प्रतिबिंबित करती है।
विधायी विशेषाधिकार के महत्व पर प्रकाश डालते हुए अध्यक्ष ने कहा कि सदन का विशेषाधिकार यह सुनिश्चित करता है कि सदस्य बिना किसी बाहरी दबाव के स्वतंत्र रूप से चर्चा में भाग ले सकें।
उन्होंने आगे कहा कि सदन के प्रत्येक सदस्य को कुछ विशेषाधिकार प्राप्त हैं, और इन विशेषाधिकारों में किसी भी प्रकार का हस्तक्षेप, छेड़छाड़ या उल्लंघन बिल्कुल भी बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।
विशेषाधिकार समिति में अध्यक्ष प्रद्युम्न सिंह राजपूत, अभय कुमार वर्मा, अजय कुमार महावर, नीरज बसोया, राम सिंह नेता जी, रवि कांत, सतीश उपाध्याय, सुरेंद्र कुमार और सूर्य प्रकाश खत्री शामिल हैं।


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