पठानकोट-जोगिंदरनगर नैरो गेज रेलवे लाइन पर ट्रेन सेवाओं की बहाली के संबंध में अंतिम निर्णय 24 और 25 फरवरी को पटरी के व्यापक निरीक्षण के बाद लिया जाएगा।
पठानकोट के पास चक्की नदी पर बने रेलवे पुल के ढह जाने के बाद लगभग तीन साल पहले इस ऐतिहासिक मार्ग पर नियमित रेल सेवाएं निलंबित कर दी गई थीं। तब से कांगड़ा और जोगिंदरनगर के बीच केवल आंशिक सेवाएं ही चल रही थीं। रेल सेवाएं निलंबित होने से पहले, इस मार्ग पर प्रतिदिन सात जोड़ी ट्रेनें चलती थीं, जो 24 रेलवे स्टेशनों को कवर करती थीं।
भारतीय रेलवे के एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि सुरक्षा संबंधी चिंताओं और तकनीकी मंजूरी लंबित होने के कारण इस मार्ग पर सेवाएं रोक दी गई हैं। हालांकि चक्की पुल के पुनर्निर्माण का काम पूरा हो चुका है, लेकिन रेलवे सुरक्षा आयुक्त (सीआरएस) पूर्ण परिचालन फिर से शुरू करने की मंजूरी देने से पहले ट्रैक और संबंधित बुनियादी ढांचे का विस्तृत निरीक्षण करेंगे।
अधिकारी ने बताया कि यात्रियों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए आवश्यक मरम्मत और सुदृढ़ीकरण कार्य प्राथमिकता के आधार पर किए जा रहे हैं। उन्होंने कहा कि निरीक्षण दल मार्ग पर स्थित पुलों, पटरियों की संरेखण, सिग्नल प्रणालियों और अन्य संरचनात्मक घटकों की गहन जांच करेगा। उन्होंने आगे कहा कि सक्षम प्राधिकारी द्वारा अंतिम मंजूरी जारी होने के बाद ही सेवाएं पुनः शुरू की जाएंगी।
उन्होंने कहा कि सुरक्षा प्रोटोकॉल का कड़ाई से पालन करना हमारी सर्वोच्च प्राथमिकता है और यात्रियों की सुरक्षा से कोई समझौता नहीं किया जाएगा। पठानकोट-जोगिंदरनगर रेलवे लाइन कांगड़ा जिले के कई हिस्सों के लिए जीवन रेखा का काम करती है, जो दूरस्थ पहाड़ी क्षेत्रों को मैदानी इलाकों से जोड़ती है।

