वाशिंगटन, अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने एक पुराने “प्रेसिडेंशियल फिटनेस टेस्ट” कार्यक्रम को फिर से शुरू करने की घोषणा की है। यह कार्यक्रम पहले अमेरिकी स्कूलों में बच्चों की शारीरिक फिटनेस जांचने के लिए चलाया जाता था, लेकिन बराक ओबामा सरकार के दौरान इसे बंद कर दिया गया था।
व्हाइट हाउस में आयोजित एक कार्यक्रम में ट्रंप ने खिलाड़ियों, अधिकारियों और बच्चों के साथ मिलकर युवाओं में फिटनेस और खेल भावना को बढ़ावा देने की बात कही। इस कार्यक्रम में मशहूर गोल्फ ब्रायसन डीचैम्ब्यू, गोल्फर गैरी प्लेयर और पूर्व एनएचएल खिलाड़ी टी. जे. ओशी जैसे पेशेवर एथलीट भी शामिल हुए।
ट्रंप ने कहा, “आज मैंने एक घोषणापत्र पर हस्ताक्षर किए हैं, जिसमें राष्ट्रीय युवा खेल और फिटनेस को मान्यता दी गई है। साथ ही, मैंने नए और फिर से शुरू किए गए ‘प्रेसिडेंशियल फिटनेस टेस्ट अवार्ड’ की पहली प्रति पर भी हस्ताक्षर किए हैं। यह एक ऐसा प्रमाणपत्र है जो शारीरिक फिटनेस के ‘गोल्ड स्टैंडर्ड’ (सर्वोच्च मानक) को हासिल करने की उपलब्धि को मान्यता देता है।”
यह कार्यक्रम जॉन एफ. केनेडी के राष्ट्रपति कार्यकाल के दौरान शुरू किया गया था। 2013 में एक नया कार्यक्रम आने से पहले यह लंबे समय तक अमेरिकी स्कूलों का एक अहम हिस्सा रहा था।
ट्रंप ने अपने भाषण में खेल प्रतियोगिता और अनुशासन पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि प्रतिस्पर्धा अमेरिका की पहचान है और देश को आगे बनाए रखने के लिए जरूरी है।
स्वास्थ्य और मानव सेवा सचिव रॉबर्ट एफ. कैनेडी जूनियर ने कहा, “अब हम दुनिया के सबसे ज्यादा बीमार देशों में से एक बन गए हैं। हमारे बच्चों में मोटापे का स्तर 5 प्रतिशत से बढ़कर 20 प्रतिशत तक पहुंच गया है। 70 प्रतिशत वयस्क मोटे या ज़्यादा वज़न वाले हैं और 77 प्रतिशत बच्चे सैन्य सेवा के लिए जरूरी शारीरिक मानकों को पूरा नहीं कर पाते हैं।”
केनेडी ने अपने अंकल, राष्ट्रपति कैनेडी के कार्यकाल में शुरू किए गए मूल कार्यक्रम की भी सराहना की। उन्होंने कहा, “यह हमारे लिए एक ऐसी यादगार और अहम रस्म थी, जिसे मेरी पीढ़ी का हर व्यक्ति आज भी याद करता है।”
अमेरिका के रक्षा मंत्री पीट हेगसेथ ने कहा कि युवाओं की शारीरिक फिटनेस सीधे सेना की तैयारी से जुड़ी हुई है। उन्होंने चिंता जताई कि लगभग तीन-चौथाई अमेरिकी युवा सेना में भर्ती होने के योग्य नहीं हैं।
प्रेसिडेंशियल फिटनेस टेस्ट को शीत युद्ध के दौर में राष्ट्रीय स्तर पर शुरू किया गया था, जब यूरोपीय युवाओं की तुलना में अमेरिकी युवाओं की शारीरिक तैयारी को लेकर चिंताएं बढ़ रही थीं। इस टेस्ट में आम तौर पर पुल-अप्स, सिट-अप्स, शटल रन और सहनशक्ति वाले व्यायाम शामिल होते थे और सबसे अच्छा प्रदर्शन करने वाले छात्रों को पुरस्कार और प्रमाण पत्र दिए जाते थे।
यह फैसला ऐसे समय में आया है जब भारत समेत कई देशों में बच्चों के बीच बढ़ते मोटापे, मोबाइल और स्क्रीन की लत तथा कोविड महामारी के बाद कम हुई शारीरिक गतिविधियों को लेकर चिंता बढ़ रही है। इसी कारण कई सरकारें फिटनेस, खेल और स्वास्थ्य जागरूकता अभियान चला रही हैं।

