डॉ. यशवंत सिंह परमार बागवानी एवं वानिकी विश्वविद्यालय, नौनी के पुष्पकृषि एवं भूदृश्य विभाग ने सोमवार को ट्यूलिप और ऑर्किड महोत्सव-सह-फूल प्रदर्शनी का आयोजन किया। इस कार्यक्रम में वैज्ञानिकों, छात्रों, किसानों और फूल प्रेमियों ने भाग लिया। इस महोत्सव का उद्देश्य पुष्पकृषि को बढ़ावा देना, सजावटी विविधता का प्रदर्शन करना और शोधकर्ताओं और किसानों के बीच संवाद को प्रोत्साहित करना था।
मुख्य अतिथि सोलन के डीसी मनमोहन शर्मा ने वाणिज्यिक पुष्पकृषि और नवोन्मेषी भूदृश्य विकास के क्षेत्र में शिक्षण, अनुसंधान और प्रचार-प्रसार को आगे बढ़ाने में विभाग के संकाय सदस्यों और शोधार्थियों के कठिन परिश्रम और वैज्ञानिक दृष्टिकोण की सराहना की। उन्होंने ऐसे भूदृश्यों की पर्यटन क्षमता और राज्य में पर्यावरण-अनुकूल पर्यटन गतिविधियों को बढ़ावा देने के अवसरों पर प्रकाश डाला।
अनुसंधान निदेशक देविना वैद्य ने क्षेत्र में पुष्पकृषि को आगे बढ़ाने में अनुसंधान और नवाचार के महत्व पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि ट्यूलिप और ऑर्किड में पुष्पकृषि उद्योग के लिए अपार संभावनाएं हैं। उन्होंने आगे कहा कि इस प्रकार की उच्च मूल्य वाली फसलों की खेती से किसानों की आय में उल्लेखनीय वृद्धि हो सकती है।
छात्रों और किसानों ने पुष्पसंगठन और फोटोग्राफी प्रतियोगिताओं में भी भाग लिया। इस अवसर पर विश्वविद्यालय ने दो महत्वपूर्ण प्रकाशनों का विमोचन किया – देशी सजावटी पौधों पर एक टेबल कैलेंडर और ‘ट्यूलिप की सुंदरता’ नामक एक पुस्तिका। ये प्रकाशन पुष्पकृषि में विश्वविद्यालय के कार्यों को उजागर करते हैं, विशेष रूप से हिमालयी क्षेत्र में ट्यूलिप की खेती, प्रबंधन और सौंदर्य मूल्य को।
प्रधान शोधकर्ता पूजा शर्मा ने बताया कि विश्वविद्यालय पिछले एक दशक से ट्यूलिप पर काम कर रहा है और हाल ही में प्रदर्शन और प्रशिक्षण के लिए 29 किस्मों के 4,000 से अधिक बल्ब लगाए गए हैं। उन्होंने यह भी बताया कि किसानों के लिए व्यावसायिक पुष्पकृषि कार्यक्रम भी शुरू किया गया है।


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