यहां के पास भगथला खुर्द गांव के एक गरीब परिवार के युवक गुरप्रीत सिंह का पार्थिव शरीर दुबई में उनकी मृत्यु के 24 दिन बाद उनके पैतृक घर पहुंचा, जिससे उनके शोक संतप्त परिवार का लंबा इंतजार समाप्त हुआ।
गुरप्रीत बेहतर भविष्य बनाने और अपने परिवार को गरीबी से बाहर निकालने की उम्मीद से खाड़ी देश गया था। हालांकि, दुबई पहुंचने के महज दो दिन बाद ही उसकी मौत हो गई, खबरों के मुताबिक अचानक दिल का दौरा पड़ने से।
परिवार उनके असामयिक निधन से ही नहीं, बल्कि उनके पार्थिव शरीर को भारत वापस लाने की जटिल प्रक्रियाओं और भारी खर्चों से भी स्तब्ध था। आर्थिक बोझ सहन न कर पाने के कारण उन्होंने दुबई स्थित व्यवसायी और सरबत दा भला चैरिटेबल ट्रस्ट के प्रबंध न्यासी डॉ. एसपी सिंह ओबेरॉय से सहायता मांगी।
विदेश में मरने वाले प्रवासी कामगारों के पार्थिव शरीर को स्वदेश वापस लाने के लिए विख्यात डॉ. ओबेरॉय ने आवश्यक कानूनी औपचारिकताओं और कागजी कार्रवाई को पूरा करने के साथ-साथ दुबई में परिवहन खर्चों की व्यवस्था भी की। इसके बाद पार्थिव शरीर को भारत वापस लाया गया, जिससे परिवार अंतिम संस्कार कर सका।
आज गुरप्रीत का शव घर पहुंचने पर पूरे गांव में शोक की लहर दौड़ गई। परिवार के सदस्यों और गांव के बुजुर्गों ने समय पर हस्तक्षेप करने के लिए डॉ. ओबेरॉय के प्रति आभार व्यक्त किया और कहा कि उनके सहयोग के बिना, गरीब परिवार के लिए अपने बेटे को अंतिम संस्कार के लिए घर लाना लगभग असंभव होता।

