N1Live National राष्ट्रीय राजनीति में दो ध्रुव स्पष्ट, विपक्षी दलों को साझा रणनीति पर आगे बढ़ना होगा : शरद पवार
National

राष्ट्रीय राजनीति में दो ध्रुव स्पष्ट, विपक्षी दलों को साझा रणनीति पर आगे बढ़ना होगा : शरद पवार

Two poles are clear in national politics, opposition parties will have to move forward on a common strategy: Sharad Pawar

राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली में विपक्षी दलों के ‘इंडिया’ ब्लॉक की महत्वपूर्ण बैठक के बीच राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (शरद पवार गुट) के अध्यक्ष शरद पवार ने विपक्षी एकता और भविष्य की राजनीतिक रणनीति को लेकर अपनी प्रतिक्रिया दी। उन्होंने कहा कि राष्ट्रीय राजनीति में इस समय दो स्पष्ट ध्रुव दिखाई दे रहे हैं, जिनमें एक ओर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व वाला गठबंधन है, जबकि दूसरी ओर उनकी विचारधारा से असहमत राजनीतिक दल और नेता एकजुट होने का प्रयास कर रहे हैं।

शरद पवार ने कहा कि हाल ही में विभिन्न राज्यों में हुए चुनावों के दौरान विपक्षी दलों ने अलग-अलग रणनीतियां अपनाईं। कुछ राज्यों में दलों ने मिलकर चुनाव लड़ा, जबकि कुछ स्थानों पर वे अलग-अलग मैदान में उतरे। वहीं, कुछ राज्यों में चुनाव परिणामों के बाद राजनीतिक समीकरणों में बदलाव भी देखने को मिला। उन्होंने कहा कि इन परिस्थितियों को ध्यान में रखते हुए विपक्षी दलों के बीच बेहतर समन्वय और संवाद की आवश्यकता है।

पवार ने बताया कि तमिलनाडु की सत्तारूढ़ पार्टी डीएमके इस बैठक में शामिल नहीं हो रही है, लेकिन विपक्षी एकता को मजबूत करने की दिशा में प्रयास जारी हैं। उन्होंने कहा कि अगले 8 से 15 दिनों के भीतर वरिष्ठ विपक्षी नेताओं की एक और बैठक आयोजित की जाएगी, जिसमें व्यापक स्तर पर चर्चा कर आगे की रणनीति तय करने की कोशिश की जाएगी।

एनसीपी (शरद पवार गुट) प्रमुख ने उम्मीद जताई कि विपक्षी दलों के बीच मौजूद मतभेदों का समाधान निकलेगा और सभी दल एक साझा राजनीतिक दृष्टिकोण विकसित करने में सफल होंगे। उन्होंने कहा कि किसी भी दल को अतिवादी या अत्यधिक कठोर रुख अपनाने से बचना चाहिए क्योंकि विपक्षी एकता का उद्देश्य व्यापक लोकतांत्रिक सहमति बनाना है।

दिल्ली में आयोजित इस बैठक में एनसीपी (शरद पवार गुट) की ओर से सांसद सुप्रिया सुले शामिल हुई हैं। पवार ने कहा कि बैठक के निष्कर्ष और आगे की दिशा शाम तक स्पष्ट हो जाएगी। उन्होंने यह भी कहा कि अगले दो से तीन वर्षों में कोई बड़ा राष्ट्रीय चुनाव नहीं होने के कारण विपक्षी दलों के पास अपने संगठनात्मक ढांचे को मजबूत करने और साझा रणनीति तैयार करने के लिए पर्याप्त समय उपलब्ध है।

Exit mobile version