शिमला जिले के ऊंचे इलाकों में स्थित सेब उत्पादक क्षेत्रों में आज सुबह ताजा हिमपात हुआ, जिससे बागों को भारी नुकसान पहुंचा। बाघी, रत्नारी, बलसन और चौपाल सहित प्रमुख सेब उत्पादक क्षेत्रों में हिमपात की सूचना मिली है।
ओलावृष्टि का सबसे गंभीर प्रभाव उन बागों में देखा गया है जहां पेड़ों को ओलावृष्टि से बचाने वाले जालों से ढका गया है। बाघी के एक बाग मालिक ने बताया, “जालों पर लगभग तीन-चार इंच बर्फ जमा हो गई है। अत्यधिक वजन के कारण कई बागों में बांस के सहारे टूट गए हैं और पेड़ क्षतिग्रस्त हो गए हैं।”
रत्नारी के बागवान सतपाल चौहान ने कहा कि बेमौसम बर्फबारी से न केवल पेड़ क्षतिग्रस्त होंगे बल्कि इस साल की फसल भी प्रभावित होगी। उन्होंने कहा, “तेज ठंड से गुलाबी कलियों और फूलों को नुकसान पहुंचेगा और परागण बाधित होगा। बागवानों को भारी नुकसान होने की संभावना है।”
हाल के दिनों में इस क्षेत्र में बार-बार ओलावृष्टि हुई है, जिससे काफी नुकसान हुआ है। बर्फबारी के इस नए दौर से स्थिति और बिगड़ने की आशंका है। चौहान ने कहा, “मौसम में अनियमितता सेब की खेती के लिए एक बड़ी चिंता का विषय बन गई है। हमने अप्रैल 2022 में भी बर्फबारी देखी थी। उत्पादकों के लिए परिस्थितियां लगातार चुनौतीपूर्ण होती जा रही हैं।”
तापमान में तेजी से गिरावट के साथ, पाले के बढ़ते खतरे ने बागवानों की परेशानी को और बढ़ा दिया है।


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