January 17, 2026
World

अमेरिकी कोर्ट ने तीन भारतीयों को आईसीई की गिरफ्तारी से रिहा करने का दिया आदेश

US court orders release of three Indians from ICE custody

 

वॉशिंगटन, अमेरिका के कैलिफोर्निया में अमेरिकी फेडरल जजों ने प्रवासी अधिकारियों को तीन भारतीय नागरिकों को रिहा करने का आदेश दिया है। दरअसल, कोर्ट का कहना है कि इन प्रवासी भारतीय नागरिकों को पहले अमेरिका में रहने की इजाजत दी गई थी और फिर बिना सुनवाई या सही नोटिस के हिरासत में लिया गया।

इस हफ्ते कैलिफोर्निया के पूर्वी और दक्षिणी जिले में अलग-अलग मामलों में कोर्ट की तरफ से ये फैसले जारी किए गए हैं। हर मामले में, कोर्ट ने पाया कि प्रवासी और कानून प्रवर्तन ने इन लोगों को दोबारा गिरफ्तार करने से पहले बेसिक प्रक्रिया की जरूरतों को पूरा नहीं किया।

बता दें, अमेरिका में ट्रंप की वापसी के बाद से इमिग्रेशन नीति में कई बड़े बदलाव कर कानून सख्त कर दिए गए हैं। इसी के तहत अमेरिका में रह रहे प्रवासियों की कड़ी जांच की जा रही है।

कोर्ट की तरफ से जिन तीन भारतीय नागरिकों के पक्ष में फैसला सुनाया है, उन्हें इमिग्रेशन अधिकारियों ने पहले रिहा कर दिया था और बाद में फिर से उन्हें हिरासत में लिया गया। पहले मामले में, अमेरिकी डिस्ट्रिक्ट जज ट्रॉय एल ननली ने 21 साल के हरमीत एस को रिहा करने का आदेश दिया, जो अगस्त 2022 में अमेरिका गए थे।

कोर्ट के रिकॉर्ड से पता चलता है कि हरमीत को फेडरल चाइल्ड प्रोटेक्शन कानूनों के तहत नाबालिग होने पर रिहा किया गया था। उसका इमिग्रेशन केस अभी भी पेंडिंग है। बाद में उसने डिपार्टमेंट ऑफ होमलैंड सिक्योरिटी द्वारा चलाए जा रहे एक अल्टरनेटिव-टू-डिटेंशन प्रोग्राम में एनरोल किया। कोर्ट ने कहा कि उसने सभी शर्तों का पालन किया और उसका कोई आपराधिक इतिहास भी नहीं है।

इससे पहले हरमीत नवंबर 2025 में इन-पर्सन चेक-इन के लिए आईसीई के सामने पेश हुए थे। उन्हें बिना किसी एडवांस नोटिस के हिरासत में लिया गया। वह बिना किसी बॉन्ड हियरिंग के एक महीने से ज्यादा समय तक हिरासत में रहे। ऐसे में अब जज ननली ने फैसला सुनाया कि हिरासत ने शायद 5वें संशोधन की प्रक्रिया ड्यू प्रोसेस क्लॉज का उल्लंघन किया है।

बता दें, अमेरिका में ड्यू प्रोसेस क्लॉज 14वें संविधान संशोधन की वह प्रक्रिया है जो सरकार को किसी भी व्यक्ति के जीवन, स्वतंत्रता या संपत्ति को कानून की उचित प्रक्रिया के बिना छीनने से रोकती है।

इसी के तहत कोर्ट ने हरमीत को तुरंत रिहा करने का आदेश दिया और इमिग्रेशन अधिकारियों को उसे दोबारा गिरफ्तार करने से रोक दिया। कोर्ट ने फिर से गिरफ्तारी के लिए शर्त रखी है कि वे पहले नोटिस या फिर सुनवाई करें। जज ने कहा कि भविष्य में किसी भी हिरासत के लिए यह सबूत चाहिए होगा कि हरमीत खतरा पैदा करता है या उसके भागने की संभावना है।

इसके अलावा, जज ननली ने अन्य मामले में सावन के. को रिहा करने का आदेश दिया है। सावन के. एक भारतीय नागरिक हैं और सितंबर 2024 में अमेरिका आए थे। कोर्ट के अनुसार, सावन को एंट्री के तुरंत बाद हिरासत में लिया गया था। सावन ने भारत में राजनीतिक उत्पीड़न का डर बताया, और जब आईसीई ने उन्हें रिहा किया, तब तक सावन का असाइलम एप्लीकेशन पेंडिंग था।

अपनी रिहाई के दौरान, सावन आईसीई चेक-इन के लिए पेश हुआ। इसके बावजूद, उसे सितंबर 2025 में एक रूटीन अपॉइंटमेंट के दौरान फिर से हिरासत में लिया गया। कोर्ट ने कहा कि सावन को बिना वारंट या सुनवाई के करीब चार महीने तक हिरासत में रखा गया।

तीसरे मामले में, दक्षिणी कैलिफोर्निया में, अमेरिकी जिला जज जेनिस एल. सैममार्टिनो ने इंपीरियल रीजनल डिटेंशन सेंटर में डिटेन किए गए भारतीय नागरिक अमित के लिए हेबियस कॉर्पस की रिट, यानी फिजिकली उपस्थित होने की रिट दी।

कोर्ट के अनुसार, अमित सितंबर 2022 में अमेरिका आए थे। उन्हें कुछ समय के लिए डिटेन किया गया और फिर कॉग्निजेंस के ऑर्डर पर रिहा कर दिया गया। रिहा होने के बाद, अमित को नौकरी मिल गई और उन्होंने असाइलम के लिए अप्लाई किया। फाइलिंग के मुताबिक, उनका कोई आपराधिक रिकॉर्ड नहीं था। सितंबर 2025 में, अमित को उनके घर के बाहर तब गिरफ्तार किया गया जब वह काम पर जाने के लिए वाहन का इंतजार कर रहे थे।

 

Leave feedback about this

  • Service