अंतर्राष्ट्रीय धार्मिक स्वतंत्रता पर अमेरिकी आयोग (USCIRF) ने ब्रिटिश मूल के सिख कार्यकर्ता जगतार सिंह जोहल को जमानत देने के दिल्ली उच्च न्यायालय के फैसले का स्वागत किया है , साथ ही अमेरिकी सरकार से आग्रह किया है कि वह उन अन्य व्यक्तियों के मामलों में भारतीय अधिकारियों के साथ बातचीत करे जिन्हें वह धार्मिक स्वतंत्रता या विश्वास (FoRB) का कैदी मानता है।
यूएससीआईआरएफ एक स्वतंत्र, द्विदलीय अमेरिकी सरकारी आयोग है जिसे विदेशों में धार्मिक स्वतंत्रता की निगरानी के लिए 1998 के अंतर्राष्ट्रीय धार्मिक स्वतंत्रता अधिनियम के तहत बनाया गया था।
एक बयान में, यूएससीआईआरएफ के अध्यक्ष आसिफ महमूद ने कहा कि संगठन दिल्ली उच्च न्यायालय द्वारा लगभग नौ वर्षों की हिरासत के बाद जोहल को जमानत दिए जाने के फैसले का स्वागत करता है। हालांकि, उन्होंने कहा कि जोहल की ब्रिटेन वापसी और परिवार के साथ पुनर्मिलन को लेकर अनिश्चितता बनी हुई है।
यूएससीआईआरएफ के अनुसार, जोहल की जमानत की शर्तों के तहत उन्हें अपना पासपोर्ट सरेंडर करना होगा और मीडिया से बात करने पर प्रतिबंध है। आयोग ने यह भी कहा कि उन पर कई आरोप हैं जिनमें दोषी पाए जाने पर उन्हें मृत्युदंड दिया जा सकता है। जोहल को नवंबर 2017 में पंजाब में लक्षित हत्याओं की एक श्रृंखला के सिलसिले में गिरफ्तार किया गया था। जांच एजेंसियों ने उन पर आतंकी गतिविधियों और हत्या की साजिशों में शामिल होने का आरोप लगाया था। जोहल और उनके समर्थकों ने इन आरोपों से इनकार किया है।
यूएससीआईआरएफ ने जोहल के खिलाफ आरोपों को निराधार बताया और गैरकानूनी गतिविधियां (रोकथाम) अधिनियम (यूएपीए) के इस्तेमाल की आलोचना करते हुए कहा कि इसका प्रयोग अंतरराष्ट्रीय मानवाधिकार मानकों के अनुरूप नहीं है। आयोग ने यह भी कहा कि जोहल ने पहले सिख समुदाय के सदस्यों के खिलाफ कथित मानवाधिकार हनन के बारे में लिखा था।
संगठन ने कहा कि जोहल के मुकदमे में बार-बार देरी हुई है और आरोप लगाया कि अधिकारी उसके खिलाफ विश्वसनीय सबूत पेश करने में विफल रहे हैं। इसने संयुक्त राष्ट्र के विशेषज्ञों की उन रिपोर्टों का हवाला दिया जिनमें उसकी हिरासत को मनमाना बताया गया था और हिरासत में उसके साथ किए गए व्यवहार पर चिंता व्यक्त की।
जोहल ने आरोप लगाया है कि उन्हें हिरासत में यातनाएं दी गईं और जबरन कबूलनामा करवाया गया। भारतीय अधिकारियों ने पहले इन आरोपों को खारिज कर दिया था। यूएससीआईआरएफ ने अमेरिकी सरकार से आग्रह किया कि वह भारत पर जोहल की हिरासत और उसके साथ किए गए व्यवहार की पूरी जांच कराने के लिए दबाव डाले और यदि उल्लंघन साबित होते हैं तो दोषियों को जवाबदेह ठहराए।
यूएससीआईआरएफ की उपाध्यक्ष सेसे हील ने कहा कि जोहल का मामला भारत में धार्मिक अल्पसंख्यकों को प्रभावित करने वाले प्रतिबंधों के व्यापक स्वरूप को दर्शाता है, जैसा कि आयोग ने बताया है। उन्होंने उमर खालिद और शरजील इमाम के मामलों का भी जिक्र किया, जो यूएपीए से संबंधित मामलों में अभी भी जेल में बंद हैं।
भारत ने मानवाधिकार और धार्मिक स्वतंत्रता के अपने रिकॉर्ड को लेकर अंतरराष्ट्रीय आलोचनाओं को बार-बार खारिज किया है और यह दावा किया है कि उसके लोकतांत्रिक संस्थान, न्यायपालिका और संवैधानिक सुरक्षा उपाय सभी नागरिकों के अधिकारों की रक्षा करते हैं। नई दिल्ली ने आतंकवाद और राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए खतरों से निपटने के लिए आवश्यक कानूनी साधन के रूप में UAPA का बचाव भी किया है।
अपनी 2026 की वार्षिक रिपोर्ट में, यूएससीआईआरएफ ने कथित धार्मिक स्वतंत्रता उल्लंघनों के मद्देनजर अमेरिकी विदेश विभाग को भारत को “विशेष चिंता का देश” घोषित करने की सिफारिश की थी। भारतीय सरकार ने पहले भी ऐसी सिफारिशों को खारिज करते हुए यूएससीआईआरएफ के आकलन को पक्षपातपूर्ण और अपूर्ण जानकारी पर आधारित बताया था।

