शनिवार रात बहादुरगढ़ कस्बे के एक निजी स्कूल में अंधाधुंध फायरिंग की घटना में शामिल दो आरोपियों को गिरफ्तार करने में स्थानीय पुलिस के लिए कृत्रिम बुद्धिमत्ता (एआई) और सोशल मीडिया का उपयोग महत्वपूर्ण साबित हुआ। पुलिस ने सीसीटीवी फुटेज का विश्लेषण करने के लिए एआई और फेसबुक व इंस्टाग्राम सहित सोशल मीडिया का इस्तेमाल किया। इससे फुटेज की स्पष्टता बढ़ी और एक आरोपी के हाथ पर रंग-बिरंगे धागे बंधे हुए दिखाई दिए। इस महत्वपूर्ण जानकारी से जांचकर्ताओं को सोशल मीडिया प्रोफाइल के जरिए संदिग्धों का पता लगाने में मदद मिली।
जिस स्कूल को निशाना बनाया गया है, वह स्थानीय भाजपा नेता और हरियाणा ओलंपिक एसोसिएशन के उपाध्यक्ष राकेश कोच का है। हालांकि, इस घटना से उनका कोई संबंध नहीं है। दरअसल, यह घटना उनके भाई योगेश उर्फ सीतू से जुड़ी है, जो परिसर से सटे एक अन्य स्कूल का संचालन करते हैं। पुलिस ने त्वरित कार्रवाई करते हुए सोमवार को बहादुरगढ़ निवासी सतेंद्र और उसके साथी एमपी माजरा गांव निवासी दीपेंद्र उर्फ दीपू को गिरफ्तार कर लिया और 24 घंटे के भीतर मामले को सुलझा लिया। तीसरा आरोपी अभी भी फरार है और पुलिस टीमें उसके संभावित ठिकानों पर छापेमारी कर रही हैं।
घटना वाले दिन आरोपी स्विफ्ट कार में घटनास्थल पर पहुंचे। सीसीटीवी फुटेज में दो हमलावर गाड़ी से बाहर निकलते नजर आ रहे हैं। उनमें से एक के दोनों हाथों में पिस्तौल थी, जबकि दूसरे ने अपने मोबाइल फोन का कैमरा चालू करके घटना को रिकॉर्ड किया। दहशत फैलाने के इरादे से, हमलावर ने दोनों हाथों से कई गोलियां चलाईं, जिसके बाद हमलावर आसानी से मौके से फरार हो गए।
बाद में, योगेश ने पुलिस में शिकायत दर्ज कराई कि वह अपने बच्चों के साथ बरसाना धाम गया था और रात करीब 10:30 बजे घर लौटा, जिसके बाद वह सो गया। सुबह स्कूल के गेट के बाहर गोलियों के निशान मिले।
इस सफलता के बारे में बताते हुए झज्जर के डीसीपी (क्राइम) अमित दहिया ने कहा, “उस रात सतेंद्र ने निजी स्कूल पर नौ गोलियां चलाईं। हमने विज्ञान और प्रौद्योगिकी का उपयोग करते हुए सीसीटीवी फुटेज का विश्लेषण किया और एआई की मदद से बेहतर वीडियो तैयार किए। एक चेहरा पहचान में आया और आरोपी के हाथ पर लाल-काले-पीले धागे दिखाई दिए। सोशल मीडिया पर मौजूद तस्वीरों से इन विवरणों का मिलान करके हमने महत्वपूर्ण जानकारी जुटाई, जिसके आधार पर रोहतक के पास उनकी गिरफ्तारी हुई।”
उन्होंने आगे बताया कि सत्येंद्र और योगेश एक-दूसरे को जानते थे और व्यक्तिगत दुश्मनी ही इस अपराध का कारण थी। डीसीपी ने बताया, “पूछताछ के दौरान सत्येंद्र ने दावा किया कि स्कूल के मालिक द्वारा उसकी पत्नी के साथ छेड़छाड़ के कारण उसने डर पैदा करने के उद्देश्य से गोली चलाई। उस समय वह बहुत नशे में था और उसे पता नहीं था कि वह किस स्कूल को निशाना बना रहा है।” दहिया ने कहा कि मामले की आगे की जांच जारी है।


Leave feedback about this