N1Live Entertainment वसुंधरा कोमकली: 12 साल की उम्र में कुमार गंधर्व से हुई मुलाकात ने बदल दी जिंदगी, बन गईं हिंदुस्तानी संगीत की अमर आवाज
Entertainment

वसुंधरा कोमकली: 12 साल की उम्र में कुमार गंधर्व से हुई मुलाकात ने बदल दी जिंदगी, बन गईं हिंदुस्तानी संगीत की अमर आवाज

Vasundhara Komkali: Meeting Kumar Gandharva at the age of 12 changed her life, she became the immortal voice of Hindustani music.

भारतीय शास्त्रीय संगीत की दुनिया में वसुंधरा कोमकली, जिन्हें प्यार से ‘वसुंधरा ताई’ कहते है, उनका नाम बड़े ही सम्मान के साथ लिया जाता है। उन्होंने हिंदुस्तानी शास्त्रीय संगीत को अपनी मधुर आवाज और गहरी समझ से नई पहचान दी। उनकी जिंदगी का एक बेहद दिलचस्प पहलू यह था कि महज 12 साल की उम्र में उनकी मुलाकात मशहूर शास्त्रीय गायक कुमार गंधर्व से हुई थी। उसी मुलाकात ने उनके जीवन की दिशा बदल दी और उन्होंने तय कर लिया कि उन्हें शास्त्रीय संगीत ही सीखना है।

वसुंधरा कोमकली का जन्म 23 मई 1931 को झारखंड के जमशेदपुर में हुआ था। बचपन से ही घर का माहौल संगीत से भरा हुआ था। यही वजह थी कि छोटी उम्र में ही उनका मन सुरों की दुनिया में रमने लगा।

कहा जाता है कि जब वसुंधरा सिर्फ 12 साल की थीं, तब उन्होंने कोलकाता में आयोजित एक संगीत सम्मेलन में पहली बार कुमार गंधर्व को देखा और सुना। उनकी गायकी ने छोटी सी बच्ची वसुंधरा के मन पर गहरा असर डाला। उन्होंने उसी समय कुमार गंधर्व से कहा कि वह उनसे शास्त्रीय संगीत सीखना चाहती हैं। कुमार गंधर्व ने उन्हें मुंबई आने की सलाह दी, लेकिन उस समय द्वितीय विश्व युद्ध शुरू हो चुका था, जिसकी वजह से उनका मुंबई जाना संभव नहीं हो पाया।

वसुंधरा ने कोलकाता में रहकर संगीत सीखना जारी रखा। कम उम्र में ही उन्होंने ऑल इंडिया रेडियो के कोलकाता सेंटर पर गाना शुरू कर दिया था। उनकी आवाज में मिठास और सुरों की समझ इतनी गहरी थी कि लोग जल्दी ही उन्हें पहचानने लगे।

युद्ध खत्म होने के बाद साल 1946 में वसुंधरा मुंबई पहुंचीं। वहां उन्होंने प्रसिद्ध संगीतज्ञ और गायक प्रोफेसर बी.आर. देवधर से संगीत की शिक्षा ली। बाद में उन्होंने फिर से कुमार गंधर्व से संगीत की बारीकियां सीखना शुरू किया। लंबे समय तक संगीत सीखने और साथ काम करने के बाद साल 1962 में दोनों ने शादी कर ली। शादी के बाद वसुंधरा देवास में बस गईं और यहीं से उनके संगीत जीवन का नया अध्याय शुरू हुआ।

वसुंधरा कोमकली ने कई सालों तक कुमार गंधर्व के साथ मंच साझा किया। अक्सर वह उनके पीछे बैठकर तानपुरा संभालती थीं और सुरों में उनका साथ देती थीं। धीरे-धीरे वह खुद शास्त्रीय संगीत की मजबूत आवाज बन गईं। उन्होंने खयाल गायकी के साथ-साथ भजन, लोकगीत और पारंपरिक रचनाओं को भी अपनी खूबसूरत आवाज में पेश किया।

भारत सरकार ने साल 2006 में उन्हें पद्मश्री सम्मान से सम्मानित किया। इसके अलावा उन्हें संगीत नाटक अकादमी पुरस्कार सहित कई प्रतिष्ठित पुरस्कार भी मिले। वसुंधरा कोमकली की बेटी कलापिनी कोमकली भी प्रसिद्ध शास्त्रीय गायिका हैं और परिवार की संगीत परंपरा को आगे बढ़ा रही हैं। उनके पोते भुवनेश कोमकली भी संगीत की दुनिया में सक्रिय हैं 29 जुलाई 2015 को मध्य प्रदेश के देवास स्थित घर में वसुंधरा कोमकली का दिल का दौरा पड़ने से निधन हो गया। उन्होंने 84 साल की उम्र में आखिरी सांस ली।

Exit mobile version