मशहूर गायिका सोना मोहपात्रा अक्सर सामाजिक मुद्दों पर अपनी राय रखती रहती हैं। बुधवार को उन्होंने देश के अलग-अलग राज्यों के लोगों के बीच होने वाले भेदभाव और नस्लवाद के गंभीर मुद्दे पर खुलकर बात की। गायिका ने इंस्टाग्राम पर वीडियो शेयर किया, जिसमें उन्होंने उन लोगों पर तीखे सवाल उठाए जो भारत में रहकर ही दूसरे राज्यों के नागरिकों को बाहरी समझते हैं और उनके साथ गलत बर्ताव करते हैं।
सोना मोहपात्रा ने अपने वीडियो की शुरुआत करते हुए अमेरिका में भारतीयों के साथ हो रहे भेदभाव का जिक्र किया। उन्होंने कहा, “आजकल मेरे इंस्टाग्राम फीड पर अमेरिका में रहने वाले भारतीयों के ऐसे वीडियो आ रहे हैं, जिनमें उनसे ‘अपने देश वापस जाओ’ कहा जा रहा है, उनके बोलने के लहजे पर मजाक उड़ाया जा रहा है, नस्लभेदी मजाक किए जा रहे हैं और प्रवासियों को बुरा-भला कहा जा रहा है। यह बहुत बुरा और अज्ञानता भरा है और इसके खिलाफ आवाज उठानी चाहिए।”
गायिका ने वीडियो में भारतीयों को खुद के भीतर झांकने की सलाह दी। उन्होंने कहा, “इन वीडियो को देखते हुए मेरे मन में एक असहज सवाल आया और मैं उसे यहां रखना चाहती हूं। विदेशों में होने वाले नस्लवाद पर गुस्सा होने से पहले हमें यह देखना चाहिए कि हमारे अपने देश में क्या चल रहा है। क्या हम भारतीय सच में दूसरों से अलग हैं?”
सोना मोहपात्रा ने भारत में भेदभाव को उजागर करते हुए कहा, “हममें से न जाने कितने लोगों ने नॉर्थ-ईस्ट के लोगों को ‘चिंकी’ कहा होगा। बिहार, उत्तर प्रदेश या ओडिशा से आए प्रवासी मजदूरों को दूसरे शहर पहुंचते ही स्टीरियोटाइप का शिकार होना पड़ता है। नॉर्थ-ईस्ट की कितनी ही युवा महिलाओं ने मुझे बताया है कि उन्हें अपने ही देश की सड़कों पर चलने में असुरक्षित महसूस होता है। ओडिशा के एक सैलून में कुछ लड़कियों ने मुझे अपने साथ हुए बर्ताव पर कहानियां सुनाई। उनके खिलाफ नस्लभेदी टिप्पणियां की जाती हैं और उनका मानसिक उत्पीड़न होता है।”
सोना मोहपात्रा ने साफ शब्दों में कहा कि भारत जहां एक तरफ सबका स्वागत करने वाला देश माना जाता है। वहीं दूसरी तरफ यह बेहद क्रूर और भेदभाव से भरा भी हो सकता है। आज हमारे देश में उत्तर बनाम दक्षिण, राज्य बनाम राज्य और भाषा बनाम भाषा की लड़ाई चल रही है।
अपनी बात को खत्म करते हुए गायिका सोना मोहपात्रा ने कहा, “भेदभाव करने के लिए हमेशा किसी दूसरी राष्ट्रीयता की जरूरत नहीं होती। कभी-कभी आपका सरनेम, आपका लहजा या आपका चेहरा ही इसके लिए काफी होता है। अगर अमेरिका में भारतीयों के साथ भेदभाव गलत है तो हमारे द्वारा अपनों के साथ किया जाने वाला भेदभाव भी पूरी तरह गलत है, फिर चाहे वह मणिपुर का व्यक्ति हो या बिहार और तमिलनाडु का। असली सवाल यह है कि हम खुद एक-दूसरे को कितना अपनाते हैं? सोचने वाली बात है।”

