उपराष्ट्रपति सीपी राधाकृष्णन ने सोमवार को छात्रों से ईमानदारी के साथ नवाचार करने और राष्ट्र निर्माण में योगदान देने का आग्रह किया। मुरथल में दीनबंधु छोटू राम विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय (डीसीआरयूएसटी) के 8वें दीक्षांत समारोह को संबोधित करते हुए उन्होंने कहा, “जीवन में सफलता केवल उपलब्धियों से ही नहीं, बल्कि चरित्र, ईमानदारी और चुनौतियों पर काबू पाने की क्षमता से भी निर्धारित होती है।”
उन्होंने 73 छात्रों को स्वर्ण पदक प्रदान किए, 172 शोधार्थियों को पीएचडी, 552 छात्रों को स्नातकोत्तर डिग्री और 579 छात्रों को स्नातक डिग्री प्रदान की। दीनबंधु छोटू राम को श्रद्धांजलि अर्पित करते हुए उन्होंने उन्हें ईमानदारी, सामाजिक न्याय और दूरदर्शी नेतृत्व का प्रतीक बताया।
स्नातक छात्रों को बधाई देते हुए उन्होंने बताया कि स्वर्ण पदक विजेताओं में लगभग 64% महिलाएं थीं, जबकि कुल स्नातकों में लगभग आधी महिलाएं थीं। उन्होंने इसका श्रेय महिला सशक्तिकरण में हो रही वृद्धि को दिया।
विकसित राष्ट्र की परिकल्पना का जिक्र करते हुए उन्होंने कहा कि यह नवाचार, आत्मविश्वास और स्वदेशी समाधानों की दिशा में एक सकारात्मक प्रयास को दर्शाती है। उन्होंने कृत्रिम बुद्धिमत्ता, मशीन लर्निंग, रोबोटिक्स, क्वांटम कंप्यूटिंग और हरित प्रौद्योगिकी जैसे उभरते क्षेत्रों के महत्व पर भी प्रकाश डाला और छात्रों से इन्हें जिम्मेदारीपूर्वक अपनाने का आग्रह किया।
उन्होंने औपनिवेशिक मानसिकता से शिक्षा को मुक्त करने की आवश्यकता पर जोर देते हुए कहा कि सच्ची शिक्षा स्वतंत्र सोच, आत्मविश्वास और भारतीय विरासत पर गर्व को बढ़ावा देती है। राज्यपाल आशीष कुमार घोष ने कहा, “यह नए सपनों और राष्ट्र निर्माण के प्रति नवीकृत प्रतिबद्धता का दिन है,” उन्होंने आगे कहा कि स्टार्टअप, अनुसंधान और नवाचार में भारत के विकास को गति देने में युवा महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगे।
मुख्यमंत्री नायब सैनी ने कहा कि ये डिग्रियां वर्षों की कड़ी मेहनत और समर्पण का प्रतीक हैं, और उन्होंने छात्रों से प्रतिस्पर्धी दुनिया में दृढ़ और संकल्पित रहने का आग्रह किया। उन्होंने कहा, “विश्वविद्यालय का नाम दीनबंधु छोटू राम के नाम पर रखा गया है, जिन्होंने शिक्षा को गरीबी और अज्ञानता पर विजय पाने का सबसे शक्तिशाली साधन माना था।”


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