पंजाब भाजपा के एक प्रतिनिधिमंडल ने शुक्रवार को लोक भवन में राज्यपाल गुलाब चंद कटारिया से मुलाकात की और राज्य भर में नगर निगमों और परिषदों के लिए पंजाब सरकार द्वारा किए जा रहे मनमाने, जल्दबाजी में और अवैध वार्ड परिसीमन के खिलाफ तत्काल हस्तक्षेप की मांग करते हुए एक ज्ञापन सौंपा।
राज्य के कार्यकारी अध्यक्ष अश्वनी शर्मा के नेतृत्व में प्रतिनिधिमंडल ने राज्यपाल को बताया कि वार्ड परिसीमन की मौजूदा प्रक्रिया अनुचित जल्दबाजी में, पारदर्शिता के बिना और वैधानिक नियमों तथा संवैधानिक सिद्धांतों का घोर उल्लंघन करते हुए की जा रही है। ज्ञापन में इस बात पर प्रकाश डाला गया कि कोई उचित घर-घर सर्वेक्षण नहीं किया गया और प्रस्तावित वार्डों में शहरी स्थानीय निकायों में जनसंख्या के आंकड़ों में असामान्य और अस्पष्ट गिरावट दिखाई देती है, जिससे उपयोग किए गए आंकड़ों की प्रामाणिकता पर गंभीर संदेह पैदा होता है।
आरक्षण मानदंडों के दुरुपयोग को लेकर भी गंभीर चिंताएं जताई गईं, जिसमें कम अनुसूचित जाति और पिछड़े वर्ग की आबादी वाले वार्डों को आरक्षित किया गया है, जबकि उच्च अनुसूचित जाति/पिछड़े वर्ग की आबादी वाले क्षेत्रों को सामान्य वार्ड घोषित किया गया है।
प्रतिनिधिमंडल ने भारत की 16वीं जनगणना के संबंध में जारी जनगणना अधिसूचनाओं की ओर ध्यान दिलाया, जिनमें स्पष्ट रूप से जनगणना कार्यों के दौरान नगर पालिका और वार्ड सीमाओं को स्थिर रखने का निर्देश दिया गया है। ये अधिसूचनाएं स्वयं राज्यपाल के अधिकार से जारी की गई थीं। शर्मा ने कहा कि इसके बावजूद पंजाब सरकार परिसीमन की प्रक्रिया आगे बढ़ा रही है। प्रतिनिधिमंडल ने राज्यपाल से अनुरोध किया कि वे राज्य सरकार को जनगणना अधिसूचनाओं और वैधानिक प्रावधानों का सख्ती से पालन करने का निर्देश दें।


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