N1Live National पश्चिम बंगाल विधानसभा : बॉर्डर क्षेत्र दिनहाटा में तृणमूल की मजबूत पकड़, भाजपा को चुनौती
National

पश्चिम बंगाल विधानसभा : बॉर्डर क्षेत्र दिनहाटा में तृणमूल की मजबूत पकड़, भाजपा को चुनौती

West Bengal Assembly: Trinamool's strong hold in border area Dinhata, challenges BJP

19 फरवरी । दिनहाटा विधानसभा क्षेत्र पश्चिम बंगाल के कूच बिहार जिले में स्थित एक महत्वपूर्ण चुनाव क्षेत्र है। यह एक म्युनिसिपल शहर है और दिनहाटा सबडिवीजन का मुख्यालय भी। भारत-बांग्लादेश सीमा के निकट पूर्वी हिमालय की तलहटी में समतल जलोढ़ मैदानों पर बसा यह क्षेत्र सामान्य श्रेणी का है। इसमें पूरी दिनहाटा म्युनिसिपैलिटी, दिनहाटा II ब्लॉक और दिनहाटा I ब्लॉक की चार ग्राम पंचायतें शामिल हैं। यह कूच बिहार लोकसभा क्षेत्र के सात हिस्सों में से एक है।

दिनहाटा 1951 से चुनाव क्षेत्र के रूप में अस्तित्व में है, और अब तक 18 विधानसभा चुनाव हो चुके हैं, जिसमें 2021 का उपचुनाव भी शामिल है। ऐतिहासिक रूप से, ऑल इंडिया फॉरवर्ड ब्लॉक (लेफ्ट फ्रंट का हिस्सा) ने यहां आठ बार जीत दर्ज की है। कांग्रेस ने पांच बार और तृणमूल कांग्रेस ने तीन बार जीता है, जबकि अलग हुए फॉरवर्ड ब्लॉक (सोशलिस्ट) और भाजपा ने एक-एक बार सफलता हासिल की।

2011 में फॉरवर्ड ब्लॉक के उदयन गुहा ने निर्दलीय मोहम्मद इमदादुल हक को हराया था, लेकिन सीट समायोजन में एनसीपी को मिली थी। गुहा ने बगावत की और बाद में तृणमूल में शामिल हो गए। 2016 में उन्होंने फॉरवर्ड ब्लॉक के अक्षय ठाकुर को 21,793 वोटों से हराया।

2021 के चुनाव बेहद रोमांचक रहे। भाजपा के केंद्रीय मंत्री निशीथ प्रमाणिक ने तृणमूल के उदयन गुहा को मात्र 53 वोटों से हराया, लेकिन प्रमाणिक ने लोकसभा सीट बचाने के लिए विधायक पद छोड़ दिया। इससे स्थानीय मतदाताओं में नाराजगी फैली। उपचुनाव में गुहा ने तृणमूल के टिकट पर भारी अंतर (लगभग 1,64,000 वोट) से जीत हासिल की और भाजपा दूर पीछे रही।

लोकसभा स्तर पर भी बदलाव दिखा। 2009 में फॉरवर्ड ब्लॉक ने तृणमूल को हराया, 2014 में तृणमूल आगे रही, 2019 में भाजपा ने बढ़त बनाई और 2024 में तृणमूल ने भाजपा पर 18,014 वोटों से फिर जीत दर्ज की।

2024 में यहां 3,07,585 मतदाता थे, जो 2021 में 2,99,251, 2019 में 2,87,966 और 2016 में 2,73,294 थे। हालांकि सामान्य सीट है, लेकिन अनुसूचित जाति और मुस्लिम मतदाताओं की संख्या ज्यादा है। वहीं, मतदान प्रतिशत ऊंचा रहा। क्षेत्र में 2011 में 82.95 प्रतिशत, 2016 में 81.88 प्रतिशत, 2021 में 81.54 प्रतिशत और 2024 में 77.40 प्रतिशत मतदान दर्ज किया गया।

भौगोलिक रूप से दिनहाटा तीस्ता, तोर्शा और जलढाका नदियों के प्रभाव क्षेत्र में है। ये हिमालयी नदियां कूच बिहार से दक्षिण-पूर्व बहकर बांग्लादेश में ब्रह्मपुत्र से मिलती हैं। निचला इलाका बाढ़-प्रवण है, लेकिन उपजाऊ मिट्टी धान, जूट और सब्जियों की खेती के लिए अनुकूल है। सिंचाई ट्यूबवेल और छोटी नहरों से होती है। दिनहाटा स्थानीय बाजार, चावल मिलें, एग्रो-प्रोसेसिंग, व्यापार और सरकारी सेवाओं का केंद्र है।

कूच बिहार शहर से 28 किमी, न्यू अलीपुरद्वार से 54 किमी, जलपाईगुड़ी से 130 किमी और कोलकाता से करीब 700 किमी दूर है। बांग्लादेश बॉर्डर 20-25 किमी पर है और लालमोनिरहाट जिला हेडक्वार्टर, दिनहाटा से करीब 26 किमी दूर है। वहीं बांग्लादेश का दिनाजपुर करीब 100 किलोमीटर की दूरी पर है। 2009 से चुनावी मुकाबला त्रिकोणीय रहा, जिसमें तृणमूल तीन बार और भाजपा और फॉरवर्ड ब्लॉक दो-दो बार आगे रहीं। लेफ्ट-कांग्रेस गठबंधन कमजोर हो गया। 2021 में प्रमाणिक के इस्तीफे से भाजपा को नुकसान हुआ, जिसका असर 2021 के उपचुनाव और 2024 लोकसभा चुनाव में दिखा।

2021 में प्रमाणिक के इस्तीफे से भाजपा को नुकसान हुआ, जिसका असर उपचुनाव और लोकसभा में देखने को मिला। क्षेत्र में विकास, बाढ़ नियंत्रण, कृषि, और सीमा मुद्दे प्रमुख रहेंगे।

Exit mobile version