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सौरव गांगुली की कप्तानी में टीम इंडिया की सोच कैसी थी? सहवाग ने किया खुलासा

स्ट्रीमिंग रियलिटी शो ‘राइज एंड फॉल’ के होस्ट वीरेंद्र सहवाग ने भारत के सफलतम कप्तानों में से एक माने जाने वाले सौरव गांगुली के नेतृत्व में टीम इंडिया की सोच और कार्यशैली के बारे में खुलकर बात की। पूर्व क्रिकेटर ने बताया कि गांगुली की कप्तानी में टीम ने निडर और आक्रामक क्रिकेट खेलने की मानसिकता अपनाई, जिसने भारतीय क्रिकेट की नई पहचान बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।

शो प्रमोशन के दौरान वीरेंद्र सहवाग ने ‘आईएएनएस’ से ​​बात करते हुए कहा कि ‘दादा’ (सौरव गांगुली) के दौर में टीम इंडिया का फोकस विदेशी धरती पर ज्यादा से ज्यादा मैच जीतने पर था।

हर टीम की अपनी एक सोच या विचारधारा होती है, जिसके तहत वे खेलते हैं। जब उनसे मौजूदा भारतीय क्रिकेट टीम और सौरव गांगुली की कप्तानी वाली टीम की सोच में अंतर के बारे में पूछा गया, तो उन्होंने कहा, “देखिए, मैं दादा की कप्तानी वाली टीम का हिस्सा था। इसलिए, मैं उस टीम की सोच के बारे में बात कर सकता हूं। मैं मौजूदा भारतीय टीम का हिस्सा नहीं हूं, इसलिए मैं उसके बारे में बात नहीं कर पाऊंगा, क्योंकि मुझे उनके और उनके खेलने के तरीके के बारे में जानकारी नहीं है। हमारी सोच ज्यादा से ज्यादा मैच खेलने और विदेशी धरती पर जीत हासिल करने की थी। हमने इस पर काम किया और सौरव गांगुली की कप्तानी में हमने ऐसा करके दिखाया।”

इससे पहले सहवाग ने कहा था कि वह हमेशा आक्रामक होकर नहीं खेलते थे, बल्कि खेल की जरूरत के हिसाब से अपना खेलने का तरीका बदलते रहते थे। उन्होंने पहले ‘आईएएनएस’ से ​​कहा था, “ऐसा नहीं है कि मैं खेल में हमेशा आक्रामक होकर ही खेलता था। मैं जरूरत पड़ने पर डिफेंसिव होकर भी खेलता था। मैंने मुश्किल हालात का भी सामना किया है।”

अपने दौर में सहवाग और सचिन दुनिया की सबसे जबरदस्त ओपनिंग जोड़ी थी और उन्होंने बल्ले से शानदार प्रदर्शन करके टीम इंडिया को कई जीत दिलाईं। इस बीच, वीरेंद्र सहवाग ने ‘राइज एंड फॉल के दूसरे सीजन के लिए अश्नीर ग्रोवर की जगह होस्टिंग की जिम्मेदारी संभाली है। इस रियलिटी सीरीज में 15 कंटेस्टेंट 42 दिनों तक एक गेम में हिस्सा लेते हैं, जो पावर, स्ट्रैटेजी, गठबंधन और बदलते हालात पर आधारित है।

कंटेस्टेंट को दो ग्रुप में बांटा गया है: ‘रूलर्स’, जो टॉवर से गेम को कंट्रोल करते हैं, और ‘वर्कर्स’, जो बेसमेंट में रहते हैं और ऊपर जाने के मौकों के लिए संघर्ष करते हैं। सीजन 2 में दर्शकों की भागीदारी का एक नया पहलू भी जोड़ा गया है, जिसमें दर्शकों को यह तय करने की पावर मिलती है कि कौन ‘रूलर’ बनेगा और कौन ‘वर्कर’।

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