June 23, 2026
National

‘भोजन न मिलने पर सूखी रोटी पानी में भिगोकर खाते थे सुंदर सिंह भंडारी’, पुण्यतिथि पर अमित शाह ने सुनाई संघर्ष की कहानी

‘When food was unavailable, Sundar Singh Bhandari used to soak dry rotis in water and eat them’: Amit Shah recounts the story of his struggle on his death anniversary.

जनसंघ के संस्थापक सदस्य और प्रखर राष्ट्रवादी चिंतक सुंदर सिंह भंडारी की पुण्यतिथि पर पूरा देश उन्हें श्रद्धांजलि दे रहा है। इस अवसर पर केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने उनके संघर्ष के दिनों को याद किया और कहा कि आपातकाल के दौरान लोकतंत्र की रक्षा के लिए उनका संघर्ष व विपरीत परिस्थितियों में भी सिद्धांतों से समझौता न करने का उनका संकल्प हम सभी के लिए प्रेरणास्रोत है।

गृह मंत्री मित शाह ने सोमवार को सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ पर लिखा, “जनसंघ के संस्थापक सदस्य, प्रखर राष्ट्रवादी चिंतक सुंदर सिंह भंडारी की पुण्यतिथि पर उन्हें विनम्र श्रद्धांजलि। जनसंघ के प्रमुख स्तंभ सुंदर सिंह भंडारी ने भाजपा के संविधान निर्माण में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। वे संगठन के ऐसे शिल्पकार थे, जिन्होंने व्यक्ति, समाज और संगठन की प्रतिभाओं को निखारने और गढ़ने का कार्य किया। आपातकाल के दौरान लोकतंत्र की रक्षा के लिए उनका संघर्ष व विपरीत परिस्थितियों में भी सिद्धांतों से समझौता न करने का उनका संकल्प हम सभी के लिए प्रेरणास्रोत है।”

अमित शाह ने एक वीडियो भी शेयर किया, जिसमें उन्होंने कहा, “सुंदर सिंह भंडारी गुजरात के राज्यपाल थे। स्वाभाविक रूप से विद्यार्थी परिषद और युवा मोर्चा के कार्यकर्ता उनके पास आते-जाते रहते थे। उनमें से एक मैं भी था। भंडारी जी का गुजरात से भी रिश्ता है। एक दिन बैठे थे और मैंने ऐसे ही पूछ लिया कि आपके पैर को क्या हो गया है। उन्होंने बात को हंसकर टाल दिया था। तब मैंने उनसे फिर से पूछा था तो उन्होंने बोला था कि इस बात को कहीं नहीं बताना है।”

शाह ने आगे कहा, “आज वह शख्सियत इस दुनिया में नहीं है, लेकिन उनका वो वाक्य और जानकारी हम सबको प्रेरणा देती है। उन्होंने बताया था कि जब वे राजस्थान में संघ का कार्य कर रहे थे, तब काम की स्वीकृति बहुत कम थी। हर जगह पर खाना नहीं मिलना था। संघ कार्यालय पर जब आते थे, तब रोटियों को कपड़ों की तरह सुखाते थे। सूखी हुई रोटियों को कपड़े में लपेट कर उन्हें थैले में डालकर वह साइकिल पर संघ का कार्य करते थे और गांव-गांव घूमते थे।”

अमित शाह ने बताया कि उस समय साइकिल चलाने के कारण पैर की पिंडलियां चौड़ी हो गई थीं। जब भोजन नहीं मिलता था तो सूखी रोटी को पानी में भिगोकर उसे खाते थे और आगे संघ का कार्य करने के लिए निकलते थे। इस प्रकार के तपस्वी जीवन से उन्होंने संघ को आगे बढ़ाया। आज भी मैं उस वाक्य को याद करता हूं तो मेरे रोंगटे खड़े हो जाते हैं।”

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