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जब सम्मान से बड़ा कुछ नहीं लगा, तो छोड़ दिया काम, कल्पना अय्यर ने बयां किया करियर के मुश्किल दौर का दर्द

"When nothing seemed more important than self-respect, I quit the job"—Kalpana Iyer opens up about the pain of a difficult phase in her career.

मशहूर अभिनेत्री कल्पना अय्यर ने अपने करियर के उस दौर को याद किया है, जब उन्हें इंडस्ट्री में कई मुश्किल हालातों का सामना करना पड़ा था। उन्होंने हमेशा अपने उसूलों को सबसे ऊपर रखा। कल्पना अय्यर ने इंस्टाग्राम पर अपनी पुरानी तस्वीरें साझा करते हुए अपने लंबे सफर और संघर्षों के बारे में खुलकर बात की।

उन्होंने बताया कि मनोरंजन जगत में उनका सफर हमेशा आसान नहीं रहा। करियर के शुरुआती दौर में उन्हें जहां खूब प्यार और पहचान मिली, वहीं बाद के वर्षों में इंडस्ट्री में आए बदलावों ने उनके लिए परिस्थितियां बदल दीं। उन्होंने कहा कि काम के लिए उन्होंने कभी अपने सम्मान और सिद्धांतों को दांव पर नहीं लगाया।

कल्पना अय्यर ने अपने पोस्ट में लिखा, ”टेलीविजन इंडस्ट्री में मेरी यात्रा तब शुरू हुई, जब एक बेहद खास और रचनात्मक सोच रखने वाली महिला निर्देशक मीना वैष्णवी ने मुझे एक ऐसे किरदार में देखा, जिसके बारे में उस समय किसी और ने कल्पना भी नहीं की थी। उन दिनों यह फैसला लेना आसान नहीं था, क्योंकि मेरी पहचान एक डांसर और विलेन के रूप में बन चुकी थी, लेकिन उन्होंने मेरे अंदर कुछ अलग देखा और मुझे भरोसा दिलाया कि मैं यह कर सकती हूं। मैंने यह कदम खुद के लिए और उनके विश्वास के लिए उठाया। इसी वजह से मैंने दिल्ली के सीपीसी के लिए पहला टेलीविजन शो ‘कशिश’ करने का फैसला किया।”

कल्पना अय्यर ने आगे लिखा, “यह फैसला मेरे लिए एक नए सफर की शुरुआत साबित हुआ। इसने मुझे आगे बढ़ने और कई शानदार किरदार निभाने के बेहतरीन मौके दिए। इसके बाद मैंने ‘बनेगी अपनी बात’, ‘दिल लगी’, ‘जुनून’, ‘दर्द’, ‘वक्त’, ‘यूल लव स्टोरी’, ‘चंद्रकांता’, ‘कुरुक्षेत्र’, ‘फरमान’, ‘मार्गरीटा’ जैसे कई धारावाहिकों में काम किया। लंबे समय तक टेलीविजन ने मुझे व्यस्त रखा, मुझे खुशी दी और आर्थिक रूप से भी मैं सुरक्षित थी। मैं अपनी जिंदगी से खुश थी।”

उन्होंने आगे अपने संघर्षों को याद करते हुए कहा, ”फिर कुछ बदलाव आए और बिना किसी कड़वाहट के मुझे स्वीकार करना होगा कि वे सभी बदलाव मेरे पक्ष में नहीं थे। एक नई सोच और एक नया रवैया इंडस्ट्री में सामान्य होने लगा। धीरे-धीरे मुझे या तो अनादर सहना पड़ता या फिर छोटे और साधारण किरदारों को कम फीस में स्वीकार करना पड़ता। ऐसा महसूस होने लगा कि अगर काम करते रहना है तो बिना शिकायत कुछ भी और किसी भी तरह का काम स्वीकार करना होगा।”

पोस्ट के आखिर में कल्पना अय्यर ने लिखा, ”मेरे सिद्धांतों और मूल्यों की कीमत पर मैं कभी कोई काम नहीं कर सकती थी। मैंने कभी भी काम के लिए अपनी ईमानदारी और आत्मसम्मान को कम नहीं किया। इसलिए मैंने काम छोड़ने और अपनी जिंदगी में आगे बढ़ने का फैसला किया।”

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