राजस्थान-हरियाणा सीमा पर स्थित अरावली पहाड़ियों में, नूह जिले में, जेसीबी मशीनों और विस्फोटों की आवाजें अक्सर सुनाई देने लगी हैं, और अब निवासी खुद ही स्थिति को संभालने की कोशिश कर रहे हैं।
नूह गांव के लोग जेसीबी मशीनों से सड़कें क्यों खोद रहे हैं?
नूह जिले के कई सीमावर्ती गांवों की पंचायतों ने अरावली पहाड़ियों में रात के समय अवैध खनन करने वाले वाहनों की आवाजाही रोकने के लिए गांव की सड़कों की खुदाई शुरू कर दी है। छारोरा, सिलाखो, पंचगांव और आसपास के इलाकों के ग्रामीणों का दावा है कि सूर्यास्त के बाद अवैध रूप से खनन किए गए पत्थरों को ले जाने वाले ट्रैक्टर-ट्रॉलियां फिर से सक्रिय हो गई हैं।
चिला गांव में, स्थानीय निवासियों और पंचायत प्रतिनिधियों ने कथित तौर पर जेसीबी मशीनों का इस्तेमाल करके उन रास्तों को अवरुद्ध कर दिया, जिनका इस्तेमाल खनन माफिया द्वारा तौरू सदर पुलिस स्टेशन क्षेत्र के अंतर्गत आने वाले पहाड़ी इलाकों तक पहुंचने के लिए किया जाता था। तनाव बढ़ने पर पुलिस टीमों को मौके पर बुलाया गया।
खनन माफिया के खिलाफ निवासियों द्वारा क्या आरोप लगाए गए हैं?
स्थानीय निवासियों का आरोप है कि हाल के हफ्तों में, विशेषकर देर रात के समय, अवैध पत्थर खनन में तेजी आई है। ग्रामीणों के अनुसार, खनन संचालक अंधेरे की आड़ में अरावली पहाड़ियों में विस्फोट करते हैं और सुबह तक गांव के भीतरी रास्तों से पत्थरों का परिवहन करते हैं।
स्थानीय लोगों का दावा है कि भारी ट्रैक्टर-ट्रॉलियों की लगातार आवाजाही से गांव की सड़कें क्षतिग्रस्त हो गई हैं और दैनिक जीवन अस्त-व्यस्त हो गया है। कई निवासियों ने यह भी आरोप लगाया कि पहाड़ी विस्फोटों से होने वाले तेज धमाकों से रात में आसपास के गांवों में दहशत फैल जाती है।
ग्रामीणों ने आगे दावा किया कि अवैध रूप से खनन किए गए पत्थरों की आपूर्ति आसपास के क्षेत्रों में संचालित अनधिकृत निर्माण स्थलों, फार्महाउसों और क्रशर इकाइयों को की जा रही है।
पुलिस ने क्या कार्रवाई की है?
पुलिस अधिकारियों ने बताया कि तौरू सदर पुलिस स्टेशन के अधिकार क्षेत्र में आने वाले संवेदनशील गांवों, जिनमें छारोरा, सिलाखो और पंचगांव शामिल हैं, में निगरानी और देखरेख तेज कर दी गई है।
अधिकारियों ने कहा कि निरीक्षण के दौरान अवैध खनन या अवैध रूप से निकाले गए पदार्थों के परिवहन का पता चलने पर सख्त कार्रवाई की जाएगी। हालांकि, ग्रामीणों का आरोप है कि नियमित कार्रवाई के बावजूद अरावली क्षेत्र में ऐसी गतिविधियां बार-बार सामने आती रहती हैं।
अरावली पर्वतमाला में अवैध खनन एक बड़ी चिंता का विषय क्यों है?
हरियाणा के अरावली क्षेत्र में अवैध खनन के फिर से बढ़ने से पर्यावरण के क्षरण और कानून प्रवर्तन संबंधी चुनौतियों को लेकर चिंताएं फिर से बढ़ गई हैं। पर्यावरणविदों ने बार-बार चेतावनी दी है कि अनियंत्रित खनन से पहाड़ी क्षेत्रों के नाजुक पारिस्थितिकी तंत्र कमजोर होते हैं, भूजल पुनर्भरण क्षेत्रों को नुकसान पहुंचता है और भूमि क्षरण की गति तेज होती है।
हालिया आरोपों ने सीमावर्ती गांवों में खनन संचालकों के बढ़ते प्रभाव को भी उजागर किया है, जहां स्थानीय निवासी अब कथित गतिविधियों को रोकने के लिए सीधे कार्रवाई करते नजर आ रहे हैं।

