15 मई को हलवारा अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे पर पहुंचने वाली एयर इंडिया की पहली उड़ान को वाटर कैनन सलामी नहीं मिली, जो आमतौर पर किसी भी नए हवाई अड्डे पर पहली उड़ान को दी जाती है। इसे जल चाप सलामी भी कहा जाता है। इस परंपरा में हवाई अड्डे के अग्निशमन वाहन पहली बार रनवे पर चलने वाले विमान पर पानी की बड़ी-बड़ी बौछारें करते हैं। हालांकि हलवारा हवाई अड्डे पर व्यवस्थाएं कर ली गई थीं, लेकिन सुरक्षा कारणों से यह समारोह आयोजित नहीं हो सका।
सूत्रोंको बताया कि हवाई अड्डे के अधिकारी सलामी के लिए तैयार थे, लेकिन वायु सेना ने सुरक्षा कारणों से अंतिम क्षण में अनुमति देने से इनकार कर दिया। हालांकि, अधिकारियों ने इस संबंध में और अधिक जानकारी देने से मना कर दिया।
हलवारा हवाई अड्डे के एक अधिकारी ने कहा, “समारोह से शायद ही कोई फर्क पड़ता है, लेकिन यह एक यादगार अनुभव बना रहता है।” इस बीच, 16 मई को सुबह की उड़ान से दिल्ली से 26 लोग हलवारा पहुंचे, जबकि 55 लोग दिल्ली के लिए रवाना हुए। दूसरी उड़ान में 57 यात्री पहुंचे और 50 लोग दिल्ली लौटने वाली उड़ान में सवार हुए।
जल तोपों से सलामी देने की परंपरा 19 वीं और 20 वीं शताब्दी के आरंभ में शुरू हुई। अग्निशमन नौकाएँ प्रथम यात्रा, सेवानिवृत्ति या महत्वपूर्ण आगमन पर जहाजों के सम्मान में पानी की बौछार करती थीं। बाद में यह प्रथा विमानन की ओर भी स्थानांतरित हो गई।

