हरियाणा साहित्य एवं संस्कृति अकादमी के तत्वावधान में प्रोफेसर वीर सेन विनय मल्होत्रा ट्रस्ट द्वारा अंबाला छावनी में छठे अंबाला साहित्यिक सम्मेलन का सफल आयोजन किया गया। इस आयोजन में हरियाणा और पड़ोसी राज्यों के लेखक, आलोचक और साहित्य प्रेमी एक साथ आए।
अंबाला छावनी के एसडीएम विनेश कुमार ने सम्मेलन का उद्घाटन करते हुए इंटरनेट, मोबाइल प्रौद्योगिकी और कृत्रिम बुद्धिमत्ता के इस युग में साहित्यिक संस्कृति को बढ़ावा देने के लिए ट्रस्ट की सराहना की। उन्होंने लेखकों को प्रोत्साहित करने और साहित्य की प्रासंगिकता को संरक्षित करने के लिए ऐसे मंचों को सार्थक और समयोचित बताया।
एसडीएम विनेश कुमार ने दो नई पुस्तकें भी जारी कीं – डॉ. विनय कुमार मल्होत्रा की 31वीं साहित्यिक कृति “बहुवर्गी-कविता संग्रह”, और कैथल के करमचंद केसर की हरियाणवी ग़ज़लों का संग्रह “गुल्लर के फूल”।
ट्रस्ट के अध्यक्ष डॉ. विनय मल्होत्रा ने ट्रस्ट की चल रही साहित्यिक और सांस्कृतिक पहलों पर प्रकाश डाला। ट्रस्टी दीपक जैन ने अंबाला छावनी स्थित मिनी सचिवालय में केंद्रीय सरकारी पुस्तकालय के सुधार के लिए रचनात्मक सुझाव भी दिए।
दिनभर चलने वाला यह सम्मेलन चार सत्रों में आयोजित किया गया और इसमें क्षेत्र के 35 लेखकों की नवप्रकाशित पुस्तकों का विमोचन किया गया। पंद्रह पुस्तक समीक्षकों और न्यासियों ने भी सक्रिय रूप से भाग लिया। इन पुस्तकों में कविता, कथा साहित्य, यात्रा वृत्तांत, संस्मरण, आत्मकथाएँ, हरियाणवी ग़ज़लें, भारतीय राजनीतिक चिंतन, कूटनीति और 1857 के विद्रोह पर आधारित ऐतिहासिक रचनाएँ जैसी विविध विधाएँ शामिल थीं। प्रकाशन हिंदी, पंजाबी और अंग्रेजी में थे।
सम्मान समारोह की अध्यक्षता सनातन धर्म प्रतिनिधि सभा के पूर्व प्रधानाचार्य और अध्यक्ष डॉ. देशबंधु ने की, जिन्होंने सभी लेखकों को सम्मानित किया। प्रख्यात साहित्यकार डॉ. रतन सिंह ढिल्लों ने साहित्यिक मूल्यांकन में आलोचनात्मक पुस्तक समीक्षाओं के महत्व पर बल दिया।

