March 27, 2026
National

विश्व व्यापार संगठन में सुधार समावेशी और सदस्य-संचालित होने चाहिए: पीयूष गोयल

WTO reforms should be inclusive and member-driven: Piyush Goyal

27 मार्च । केंद्रीय वाणिज्य और उद्योग मंत्री पीयूष गोयल ने कैमरून के याउंडे में चल रहे 14वें मंत्रिस्तरीय सम्मेलन (एमसी14) में शुक्रवार को कहा कि डब्ल्यूटीओ सुधारों को एक पारदर्शी, समावेशी और सदस्य-संचालित प्रक्रिया के माध्यम से आगे बढ़ाया जाना चाहिए, जिसके मूलमंत्र में विकास हो।

उन्होंने बिना भेदभाव वाले, सर्वसम्मति आधारित निर्णय लेने और समानता जैसे प्रमुख सिद्धांतों को बनाए रखने की आवश्यकता पर भी बल दिया।

सम्मेलन के दौरान गोयल ने कैमरून के प्रधानमंत्री जोसेफ डियोन न्गुटे से मुलाकात की और भारत-कैमरून सहयोग को मजबूत करने के तरीकों सहित द्विपक्षीय और बहुपक्षीय मुद्दों पर चर्चा की।

नेताओं ने विश्व व्यापार संगठन (डब्ल्यूटीओ) के मूलभूत मुद्दों, जिनमें इसके मूल सिद्धांत भी शामिल हैं, पर भी चर्चा की।

गोयल ने एमसी14 के एजेंडे पर चर्चा करने के लिए डब्ल्यूटीओ की महानिदेशक न्गोजी ओकोंजो-इवेला से मुलाकात की और द्विपक्षीय व्यापार संबंधों की समीक्षा के लिए नीदरलैंड, फ्रांस और इथियोपिया के अपने समकक्षों से अलग से मुलाकात की।

इसके अतिरिक्त सम्मेलन में वाणिज्य सचिव राजेश अग्रवाल ने चिली, पैराग्वे, अमेरिका, नेपाल, फिलीपींस, सऊदी अरब, मैक्सिको, पेरू, रूस और न्यूजीलैंड के समकक्षों के साथ-साथ यूरोपीय संघ के सांसदों के एक प्रतिनिधिमंडल के साथ द्विपक्षीय बैठकें कीं।

डब्ल्यूटीओ का एमसी14 सत्र 26 मार्च को याउंडे में कैमरून के व्यापार मंत्री की अध्यक्षता में एक औपचारिक सत्र के साथ शुरू हुआ और 29 मार्च को समाप्त होगा।

उद्घाटन सत्र में डब्ल्यूटीओ की महानिदेशक न्गोजी ओकोंजो-इवेला और सदस्य देशों के व्यापार मंत्रियों और वरिष्ठ प्रतिनिधियों ने भाग लिया।

सत्र के बाद एक संक्षिप्त कार्यक्रम आयोजित किया गया, जिसमें मत्स्य पालन सब्सिडी समझौते के लागू होने पर खुशी जाहिर की गई।

इस दौरान चर्चा में एमसी14 एजेंडा और द्विपक्षीय व्यापार संबंधों को मजबूत करने के अवसरों पर ध्यान केंद्रित किया गया। चिली और पेरू के साथ हुई वार्ता में मुक्त व्यापार समझौते (एटीए) की चल रही वार्ताओं पर भी चर्चा हुई, जबकि यूरोपीय संघ और न्यूजीलैंड के साथ हुई वार्ताओं में संबंधित एफटीए वार्ताओं की प्रगति की समीक्षा की गई।

भारत ने यह भी दोहराया कि बिना भेदभाव वाला डबल्यूटीओ ढांचे का एक मूलभूत सिद्धांत बना हुआ है, जैसा कि मराकेश समझौते में परिलक्षित होता है।

देश ने विकास-केंद्रित एजेंडा की आवश्यकता पर भी बल दिया, जिसमें खाद्य सुरक्षा के लिए सार्वजनिक स्टॉकहोल्डिंग (पीएसएच) पर एक स्थायी समाधान, विकासशील और अल्प विकसित देशों (एलडीसी) के लिए प्रभावी विशेष और विभेदक व्यवहार (एसएंडडीटी) प्रावधान और एक पूर्णतः कार्यशील विवाद निपटान तंत्र की बहाली शामिल है।

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