10 मार्च । कांग्रेस सांसद सुखदेव भगत ने मंगलवार को कई अहम मुद्दों पर प्रतिक्रिया दी। उन्होंने टी20 वर्ल्ड कप ट्रॉफी को मंदिर ले जाने के विवाद पर टिप्पणी की। सुखदेव भगत ने कहा कि पूर्व क्रिकेटर और मौजूदा टीएमसी सांसद कीर्ति आजाद उस टीम का हिस्सा रहे हैं जिसने देश के लिए विश्व कप जीता था। कीर्ति आजाद एक सम्मानित सांसद हैं और उन्होंने जो मुद्दे उठाए हैं, वे चिंता का विषय हैं।
सुखदेव भगत ने आईएएनएस से कहा, “खेल हमेशा खेल भावना से खेला जाना चाहिए। जब देश जीतता है तो वह पूरे भारत की जीत होती है। यह किसी एक समुदाय, समूह या व्यक्ति की जीत नहीं होती।”
दरअसल, तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) के सांसद कीर्ति आजाद ने गौतम गंभीर और जय शाह की आलोचना की थी। उन्होंने आरोप लगाया था कि टी20 वर्ल्ड कप ट्रॉफी को अहमदाबाद के एक हिंदू मंदिर में ले जाना उचित नहीं है। कीर्ति आजाद का कहना था कि यह ट्रॉफी एक धर्मनिरपेक्ष देश का प्रतीक है, किसी एक धर्म का नहीं। उन्होंने यह भी याद दिलाया कि 1983 की विश्व कप विजेता भारतीय टीम विभिन्न समुदायों के खिलाड़ियों से मिलकर बनी थी।
सुखदेव भगत ने कहा कि जब से भाजपा सरकार सत्ता में आई है, तब से ऐसे मामलों में बढ़ोतरी हुई है। समाज को अलग-अलग पहचान के आधार पर बांटने की कोशिश की जा रही है।
लोक जनशक्ति पार्टी (राम विलास) के सांसद अरुण भारती के बयान पर प्रतिक्रिया देते हुए कांग्रेस सांसद सुखदेव भगत ने कहा कि यह एनडीए का आंतरिक मामला है, लेकिन लोकतंत्र में संख्या बहुत मायने रखती है।
उन्होंने कहा, “जब जरूरी संख्या के बिना इस तरह की बातें सामने आती हैं तो यह अजीब लगता है। एनडीए के सहयोगियों को इस पर ध्यान देना चाहिए। अगर छोटी-छोटी पार्टियां भी ऐसे बयान देने लगें और उन पर नियंत्रण न हो, तो यह हास्यास्पद लगता है।” दरअसल अरुण भारती ने कहा था कि वे चिराग पासवान को बिहार का अगला मुख्यमंत्री बनते देखना चाहते हैं।
अंतरराष्ट्रीय हालात पर सुखदेव भगत ने कहा कि मौजूदा समय में युद्ध जैसी स्थिति बनी हुई है और इसका भारत पर क्या असर पड़ेगा, इस पर गंभीरता से विचार करने की जरूरत है।
उन्होंने कहा कि भारत की अर्थव्यवस्था, संभावित ऊर्जा संकट और वहां रहने वाले भारतीयों की सुरक्षा पर चर्चा जरूरी है। उस क्षेत्र में लगभग 80 से 85 लाख भारतीय रहते हैं, जिनकी सुरक्षा बेहद महत्वपूर्ण है।
सुखदेव भगत ने कहा कि लोकतंत्र में विरोध करना एक स्वस्थ परंपरा है। उन्होंने भाजपा को याद दिलाते हुए कहा कि जब मनमोहन सिंह की सरकार थी तब भाजपा ने भी विरोध प्रदर्शन किए थे, खासकर कॉमनवेल्थ गेम्स के समय।
उन्होंने यह भी कहा कि हाल ही में जब प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी इजरायल गए थे तो वहां भी कुछ लोगों ने कार्यक्रम से वॉकआउट किया था। इसलिए विरोध को लोकतंत्र की ताकत के रूप में देखा जाना चाहिए।
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के ईरान-इजरायल संघर्ष पर दिए बयान को लेकर भी सुखदेव भगत ने प्रतिक्रिया दी। उन्होंने कहा कि किसी भी समस्या का समाधान हमला या युद्ध नहीं हो सकता।
सुखदेव भगत ने कहा, “हमला कभी भी अच्छा कदम नहीं हो सकता। पक्षों के बीच हमेशा बातचीत और संवाद होना चाहिए। युद्ध खुद एक समस्या है और वह किसी समस्या का समाधान नहीं हो सकता।”

