March 9, 2026
Entertainment

मजबूत कहानी, दमदार संवाद … सिनेमा जगत की मजबूत लेखिकाएं, जो कलम की धार से फिल्मों में जान डाल रहीं

Strong storytelling, powerful dialogue… powerful female writers from the film industry, who breathe life into films with their pens.

8 मार्च । फिल्म इंडस्ट्री में महिलाओं की भूमिका सिर्फ अभिनय तक सीमित नहीं है, बल्कि वे कहानियों को गढ़ने, पर्दे पर जीवंत करने और दर्शकों को लेखन के रूप में खास तोहफा देकर भी कमाल कर रही हैं। खास बात है कि ये लिस्ट काफी लंबी है। इसमें मेघना गुलजार से लेकर गौरी समेत कई मजबूत लेखिकाओं के नाम शामिल हैं, जो अपनी कलम की धार से फिल्मों में जान डाल रही हैं।

ये महिलाएं न केवल लेखन करती हैं बल्कि निर्देशन और प्रोडक्शन में भी अपनी छाप छोड़ रही हैं। उनकी कहानियां समाज के वास्तविक मुद्दों को उठाती हैं, भावनाओं को गहराई देती हैं और दर्शकों को सोचने पर मजबूर करती हैं। आज के दौर में ये लेखिकाएं बॉलीवुड की मजबूत स्तंभ बन चुकी हैं, जो पुरुष-प्रधान इंडस्ट्री में अपनी अलग पहचान बना रही हैं।

ये लेखिकाएं साबित करती हैं कि कलम से कहानी में जान डालना कोई छोटा काम नहीं। उनकी मेहनत से फिल्में सिर्फ मनोरंजन नहीं बल्कि समाज का आईना भी बनती हैं।

अलंकृता श्रीवास्तव एक बहुमुखी प्रतिभा हैं, वह पटकथा लेखिका, निर्देशक और निर्माता भी हैं। उन्होंने साल 2011 में ‘टर्निंग 30’ से निर्देशन की शुरुआत की थी। प्रकाश झा की ‘अपहरण’ और ‘राजनीति’ में सहायक निर्देशक के रूप में काम किया। उनकी सबसे चर्चित फिल्म ‘लिपस्टिक अंडर माई बुर्का’ है, जिसे उन्होंने लिखा और निर्देशित किया है। यह फिल्म महिलाओं की इच्छाओं और समाज की बेड़ियों पर बोलती है और अंतरराष्ट्रीय फिल्म फेस्टिवल्स में कई पुरस्कार जीते, जिसमें टोक्यो, ग्लासगो और मुम्बई फिल्म फेस्टिवल शामिल हैं।

इसके अलावा, ‘मेड इन हेवन’, ‘डॉली किट्टी और वो चमकते सितारे’, ‘बॉम्बे बेगम्स’ और ‘मॉडर्न लव: मुंबई’ जैसी वेब सीरीज में उनकी लेखनी चमकी। उनकी फिल्में महिलाओं के सशक्तिकरण और सामाजिक मुद्दों पर केंद्रित हैं।

जूही चतुर्वेदी ने अपनी संवेदनशील लेखनी से दर्शकों का दिल जीता है। अमिताभ बच्चन, दीपिका पादुकोण और इरफान खान की ‘पीकू’ उनकी सबसे यादगार लेखनी में से एक है, जिसके लिए उन्हें नेशनल अवॉर्ड और फिल्मफेयर अवॉर्ड मिले। ‘विक्की डोनर’ से उन्होंने बॉलीवुड में एंट्री की, जिसके लिए फिल्मफेयर बेस्ट स्टोरी अवॉर्ड जीता। अन्य प्रमुख फिल्में ‘अक्टूबर’, ‘गुलाबो सिताबो’ और ‘मद्रास कैफे’ हैं, जिसमें में उनके डायलॉग्स और स्क्रीनप्ले हैं।

जूही ने विज्ञापन जगत से आकर फिल्मों में कदम रखा और अब वे बॉलीवुड की सबसे मजबूत लेखिकाओं में शुमार हैं। उनकी कहानियां रोजमर्रा की जिंदगी की सच्चाई दिखाती हैं।

मेघना गुलजार लेखन व निर्देशन में अपने पिता गुलजार की विरासत को आगे बढ़ा रही हैं। ‘राजी’ और ‘छपाक’ के जरिए उन्होंने गहन कहानियां पेश कीं। ‘राजी’ ने बॉक्स ऑफिस पर कमाल किया और ‘छपाक’ एसिड अटैक पीड़ितों की आवाज बनी। उनकी साल 2023 की फिल्म ‘सैम बहादुर’ भी खूब सराहना बटोरी। ‘तलवार’ जैसी फिल्म से उन्हें लेखनी में ग्रोथ मिला। मेघना की लेखनी संवेदनशील, साहसी और सामाजिक मुद्दों पर केंद्रित है।

गौरी शिंदे ने ‘इंग्लिश विंग्लिश’ से दिल जीता, जिसमें श्रीदेवी की कमबैक कहानी थी। यह फिल्म एक मां की आत्म-सम्मान की यात्रा दिखाती है। ‘डियर जिंदगी’ में आलिया भट्ट और शाहरुख खान के साथ उन्होंने मानसिक स्वास्थ्य और रिश्तों पर खूबसूरत कहानी लिखी और निर्देशित की। गौरी की फिल्में भावनात्मक गहराई और सकारात्मक संदेश देती हैं।

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