मानसून की अपर्याप्त बारिश के कारण हिसार जिले में लगभग 80,000 हेक्टेयर कृषि भूमि इस मौसम में बिना बोए रह गई है, जबकि लंबे समय तक सूखे के कारण मूंग, कपास और धान की खड़ी फसलें तनाव के लक्षण दिखा रही हैं।
चौधरी चरण सिंह हरियाणा कृषि विश्वविद्यालय (एचएयू) के कृषि मौसम विज्ञान विभाग के अनुसार, हरियाणा में इस मानसून में सामान्य 231 मिमी के मुकाबले अब तक लगभग 176 मिमी बारिश हुई है, जिसके परिणामस्वरूप राज्यव्यापी वर्षा में कमी आई है। हालांकि, विभाग को उम्मीद है कि आने वाले कुछ दिनों में होने वाली बारिश से यह कमी दूर हो जाएगी।
हरियाणा कृषि एवं किसान कल्याण विभाग के अनुसार, हिसार जिले में लगभग 22 लाख हेक्टेयर भूमि पर बुवाई पूरी हो चुकी है। पिछले वर्ष इसी अवधि में बुवाई तीन लाख हेक्टेयर से अधिक क्षेत्र में हुई थी। हालांकि, अपर्याप्त वर्षा के कारण इस मौसम में बुवाई में देरी हुई है और खड़ी फसलों को नुकसान पहुंचा है।
जुलाई माह में हिसार में अब तक सामान्य औसत 140 मिमी के मुकाबले केवल 44.5 मिमी बारिश हुई है। वहीं, पिछले साल जुलाई के आखिरी दो दिनों में जिले में 103 मिमी बारिश दर्ज की गई थी, जिससे महीने की कुल बारिश लगभग 170 मिमी हो गई थी।
सामान्य से कम वर्षा पिछले वर्ष के बिल्कुल विपरीत है, जब अत्यधिक बारिश के कारण बाढ़ जैसी स्थिति उत्पन्न हो गई थी, जिससे हजारों एकड़ कृषि भूमि जलमग्न हो गई थी और महीनों तक जलभराव बना रहा था।
कृषि उप निदेशक डॉ. राजबीर सिंह ने बताया कि धान की रोपाई अभी भी जारी है और अगस्त के पहले सप्ताह तक जारी रहेगी।
“बारिश में देरी के कारण इस वर्ष बुवाई में बाधा आई है, लेकिन हमें उम्मीद है कि हम अगस्त के पहले सप्ताह तक बुवाई का लक्ष्य हासिल कर लेंगे।” उन्होंने कहा कि कपास की खेती का रकबा पिछले वर्ष की तुलना में थोड़ा कम रहने की संभावना है, जबकि धान और बाजरा की खेती का रकबा बढ़ने की उम्मीद है।


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