एनफोर्समेंट डायरेक्टरेट (ED) ने एक इंटरनेशनल फ्रॉड रैकेट के सिलसिले में पटियाला से चार लोगों को गिरफ्तार किया है। इन लोगों पर आरोप है कि उन्होंने पटियाला, चंडीगढ़, मोहाली और हैदराबाद में चल रहे कॉल सेंटर के ज़रिए कई US नागरिकों को ठगा। आरोपियों की पहचान हर्षिल नयनभाई रावल, जसवंत सिंह, चेतन मुंजाल और प्रणव पिथाडिया के तौर पर हुई है। इन्हें बुधवार को पटियाला में दो जगहों से गिरफ्तार किया गया। बाद में, एजेंसी को लोकल कोर्ट से उनकी ट्रांजिट रिमांड मिलने के बाद उन्हें हैदराबाद ले जाया गया।
यह गैंग पहले हैदराबाद, तेलंगाना के एक बड़े सबअर्बन इलाके और टेक्नोलॉजी हब माधापुर में एक फ्रॉड कॉल सेंटर चला रहा था। पुलिस रेड के बाद, आरोपियों ने कथित तौर पर अपना ऑपरेशन पटियाला में शिफ्ट कर दिया। ईडी ने उन्हें अमेरिकी नागरिकों को निशाना बनाने, धोखाधड़ी करने और अपराध की आय को वैध बनाने के आरोपों पर धन शोधन निवारण अधिनियम (पीएमएलए), 2002 की धारा 19 (1) के तहत गिरफ्तार किया।
इससे पहले विकास निमार को 27 जुलाई, ताराचंद निमार को 5 अगस्त और इमरान असगरी को 10 अक्टूबर को गिरफ्तार किया गया था। इन नई गिरफ्तारियों के साथ, इस मामले में गिरफ्तार किए गए आरोपियों की कुल संख्या सात हो गई है। ED के एक सीनियर अधिकारी ने बताया कि एजेंसी ने 15 सितंबर को PMLA के सेक्शन 17 के तहत पटियाला, पुणे और चंडीगढ़ में चार जगहों पर तलाशी ली थी। तलाशी के दौरान, पटियाला में दो और पुणे में एक कॉल सेंटर चलते हुए मिले, और इन सेंटरों पर करीब 220 लोग काम कर रहे थे।
एजेंसी को पता चला है कि गैंग ने कथित तौर पर क्राइम से हुई कमाई को रियल एस्टेट, सोना, गाड़ियों और अलग-अलग बिज़नेस में लगाया। क्राइम से हुई कुल कमाई लगभग 261 करोड़ रुपये आंकी गई है, जिसका एक हिस्सा कथित तौर पर चंडीगढ़ के आस-पास रियल एस्टेट में इन्वेस्ट किया गया था।
जांच के दौरान, ED ने 79 डिजिटल डिवाइस की फोरेंसिक जांच की और कॉल सेंटर चैट, लेजर, कॉल डेटा, पीड़ित की डिटेल्स और क्रिप्टोकरेंसी वॉलेट बरामद किए। छापे के दौरान पटियाला से जाली सरकारी दस्तावेज और नकली पहचान पत्र भी जब्त किए गए। ED अधिकारियों को पता चला कि गैंग ने कथित तौर पर करीब 20 लाख US टेलीफ़ोन नंबर खरीदे थे, साथ ही लोगों के नाम, पते और उम्र भी खरीदी थी। टारगेट किए गए लोगों में से कई बुज़ुर्ग नागरिक थे। डेटा जर्मनी और फ़िनलैंड के सर्वर पर होस्ट किए गए ऑटो-डायलर पर अपलोड किया गया था।
अब तक, जांच करने वालों ने 549 पीड़ितों की पहचान की है, जिनमें से कई 1940 के दशक में पैदा हुए थे। ED ने कहा कि कथित तौर पर 6,463 US टेलीफ़ोन नंबरों पर कॉल या मैसेज किए गए थे। आगे की जांच चल रही है।

