धान की कटाई के मौसम में पंजाब में खेतों में आग लगने की समस्या बनी हुई है, वहीं कमीशन फॉर एयर क्वालिटी मैनेजमेंट (CAQM) के ज़िलेवार रिव्यू से पता चला है कि ज़मीनी स्तर पर मॉनिटरिंग में बड़ी कमियां हैं, और कई ज़िले रिपोर्ट की गई घटनाओं के एक बड़े हिस्से की जांच करने में नाकाम रहे हैं।
4 नवंबर को जारी नए नोटिस में, कमीशन ने बठिंडा, फरीदकोट, फाजिल्का और जालंधर के डिप्टी कमिश्नरों और बरनाला के सीनियर सुपरिंटेंडेंट ऑफ़ पुलिस से पराली जलाने से रोकने के उपायों को लागू करने में कथित नाकामियों पर जवाब मांगा है। पांचों जिलों में 15 सितंबर से 3 नवंबर के बीच खेतों में आग लगाने की 405 घटनाएं दर्ज की गईं। बठिंडा में सबसे ज्यादा 148 घटनाएं हुईं, उसके बाद बरनाला (82), फरीदकोट (66), जालंधर (57) और फाजिल्का (52) का स्थान रहा।
कमीशन को खास तौर पर इस बात की चिंता है कि रिपोर्ट की गई आग और फिजिकल इंस्पेक्शन के बीच का अंतर है। बरनाला में, 82 घटनाओं में से सिर्फ़ 28 का इंस्पेक्शन हुआ था, जबकि बठिंडा ने अपने 148 मामलों में से 68 को वेरिफाई किया था। फरीदकोट में ये आंकड़े 66 में से 49, फाजिल्का में 52 में से 33 और जालंधर में 57 में से 44 थे।
कमीशन ने यह भी सवाल उठाया है कि पराली प्रोटेक्शन फोर्स और तय नोडल अधिकारियों ने इन जिलों में पराली जलाने के निशान वाले किसी भी नॉन-AFL खेत का पता क्यों नहीं लगाया या रिपोर्ट क्यों नहीं की, जबकि घटनाएं रिकॉर्ड की गई थीं। उसने कहा कि इससे फील्ड-लेवल सर्विलांस के असर को लेकर चिंताएं पैदा हुईं।
साल-दर-साल के आंकड़े एक और चिंता की बात बताते हैं। पिछले साल इसी समय की तुलना में फरीदकोट में पराली जलाने की घटनाओं में 69.2 प्रतिशत की बढ़ोतरी हुई, इसके बाद बरनाला में 46.4 प्रतिशत, जालंधर में 32.6 प्रतिशत और फाजिल्का में 23.8 प्रतिशत की बढ़ोतरी हुई। बठिंडा के नोटिस में इससे जुड़ी तुलना नहीं दी गई है।
कमीशन के ग्राउंड रिव्यू में यह भी पाया गया कि बरनाला, बठिंडा, फाजिल्का और जालंधर में CAQM एक्ट, 2021 के सेक्शन 14 के तहत ज़िम्मेदार अधिकारियों के खिलाफ कोई कार्रवाई शुरू नहीं की गई थी। हालांकि, फरीदकोट में अधिकारियों के खिलाफ तीन प्रॉसिक्यूशन एक्शन की रिपोर्ट मिली थी।
ये नोटिस पंजाब में पराली जलाने पर कार्रवाई की पहले की जांच के बाद आए हैं, जिसमें दूसरे जिलों के अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई भी शामिल है। इस नए कदम से जवाबदेही की प्रक्रिया पांच और जिलों तक बढ़ गई है। अधिकारियों से 10 नवंबर तक यह बताने को कहा गया है कि उनके खिलाफ कार्रवाई क्यों न की जाए। सेक्शन 14 के तहत, नियम तोड़ने पर पांच साल तक की जेल, 1 करोड़ रुपये तक का जुर्माना या दोनों हो सकते हैं।

