November 6, 2026
Punjab

पंजाब में पराली जलाने के 2,787 मामले दर्ज, 46.10 लाख रुपए का जुर्माना लगाया; 710 एफआईआर दर्ज

पंजाब में धान की पराली जलाने की घटनाएं लगातार प्रशासन के लिए चुनौती बनी हुई हैं। पंजाब प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (पीपीसीबी) की ओर से जारी 5 नवंबर तक की रिपोर्ट के अनुसार, राज्य में पराली जलाने की कुल 2,787 घटनाएं दर्ज की गई हैं। इन घटनाओं के संबंध में 2,194 स्थानों का फील्ड निरीक्षण किया गया, जबकि 994 स्थानों पर खेतों में पराली जलाने की पुष्टि हुई है।

रिपोर्ट के मुताबिक, पराली जलाने के मामलों में पर्यावरणीय मुआवजे के तहत 914 मामलों में कुल 46.10 लाख रुपए का जुर्माना लगाया गया है। इसमें से अब तक 24.85 लाख रुपए की वसूली की जा चुकी है। वहीं, पराली जलाने के मामलों में भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस) की धारा 223 के तहत कुल 710 एफआईआर दर्ज की गई हैं। इसके अलावा 829 मामलों में राजस्व रिकॉर्ड में रेड एंट्री की गई है।

जिलावार आंकड़ों में तरनतारन जिला 586 घटनाओं के साथ सबसे आगे है। यहां 553 स्थानों का निरीक्षण किया गया और 294 स्थानों पर पराली जलाने की पुष्टि हुई। इसके बाद फिरोजपुर में 361, संगरूर में 240, अमृतसर में 221 और बठिंडा में 216 घटनाएं दर्ज की गई हैं। फिरोजपुर में 163 और संगरूर में 49 स्थानों पर आग लगाने की पुष्टि हुई है।

रिपोर्ट के अनुसार, पटियाला में पराली जलाने की 156 घटनाएं दर्ज की गई हैं। इनमें से 103 स्थानों का फील्ड निरीक्षण किया गया और 59 स्थानों पर खेतों में आग लगाने की पुष्टि हुई। जिले में 42 मामलों में पर्यावरणीय मुआवजा लगाया गया है, जिसकी कुल राशि 2.15 लाख रुपए है। इसमें से 70 हजार रुपए की वसूली की गई है।

इसके अलावा पटियाला में पराली जलाने के मामलों में 27 एफआईआर दर्ज की गई हैं, जबकि 16 मामलों में राजस्व रिकॉर्ड में रेड एंट्री की गई है। जिले में 25 चेतावनी नोटिस भी जारी किए गए हैं।

रिपोर्ट के अनुसार पंजाब में धान का कुल रकबा 32.87096 लाख हेक्टेयर है, जिसमें से 5 नवंबर तक 87.60 प्रतिशत क्षेत्र में फसल की कटाई हो चुकी है। वहीं, राज्य में 786 चेतावनी नोटिस या कारण बताओ नोटिस जारी किए गए हैं। रिपोर्ट में 18 मामलों में संबंधित अधिकारियों के खिलाफ अभियोजन की कार्रवाई शुरू होने का भी उल्लेख है।

पीपीसीबी के इन आंकड़ों से स्पष्ट है कि पराली जलाने पर रोक लगाने के लिए निरीक्षण, जुर्माना, एफआईआर और राजस्व रिकॉर्ड में रेड एंट्री जैसी कार्रवाई की जा रही है। इसके बावजूद राज्य के कई जिलों में पराली जलाने की घटनाएं सामने आ रही हैं।

Leave feedback about this

  • Service