अधिकारियों ने बुधवार को बताया कि हिमाचल प्रदेश के कांगड़ा जिले की बोह घाटी में रात भर हुई बारिश में तीन लोग घायल हो गए और 12 और घर क्षतिग्रस्त हो गए।
इसके साथ ही घाटी में क्षतिग्रस्त घरों की कुल संख्या बढ़कर 18 हो गई है। मंगलवार को हुई भारी बारिश में छह घर बह गए।
मौसम विभाग ने अगले 24 घंटों में चंबा, कांगड़ा, मंडी, शिमला, सिरमौर और कुल्लू जिलों के कुछ हिस्सों में कम से मध्यम स्तर की अचानक बाढ़ के खतरे की चेतावनी दी है।
मंगलवार को घाटी के सपेदी और गारुन गांवों में बादल फटने से अचानक बाढ़ आ गई और भारी मात्रा में मलबा बह निकला। लाम गांव पर भी खतरा मंडरा रहा है। गांवों की ओर जाने वाले कई रास्ते प्रभावित हुए हैं।
बारिश से कुल 13 पक्के मकान और पांच कच्चे मकान क्षतिग्रस्त हो गए हैं और तीन लोग घायल हुए हैं। नौ गौशालाएं भी क्षतिग्रस्त हुई हैं। अधिकारियों ने बताया कि तीन भैंस, चार गाय, एक बैल और एक भेड़ की मौत हो गई है।
रिपोर्टों के अनुसार, निवासियों ने पहाड़ियों से एक जोरदार धमाके जैसी आवाज सुनी, जिसके कुछ ही क्षण बाद पानी, कीचड़ और पत्थरों का एक शक्तिशाली सैलाब तेजी से नीचे की ओर बहने लगा।
निवासियों को समय पर सुरक्षित स्थान पर पहुंचाने से किसी भी प्रकार की जानमाल की हानि को रोका जा सका।
शिमला मौसम विज्ञान केंद्र ने बुधवार के लिए कांगड़ा और मंडी जिलों में कुछ स्थानों पर भारी से बहुत भारी बारिश की आशंका के साथ ‘ऑरेंज’ अलर्ट और चंबा, कुल्लू, शिमला, सोलन और सिरमौर जिलों के कुछ हिस्सों में भारी बारिश की आशंका के साथ ‘येलो’ अलर्ट जारी किया है।
इसमें चेतावनी दी गई है कि अगले 24 घंटों में चंबा, कांगड़ा, मंडी, शिमला, सिरमौर और कुल्लू जिलों के कुछ जलक्षेत्रों और आसपास के इलाकों में कम से मध्यम स्तर की अचानक बाढ़ का खतरा बना हुआ है।
बारिश का सिलसिला 27 जुलाई तक जारी रहने की संभावना है।
अधिकारियों ने बताया कि भूस्खलन से दिब्बा और मानेद नाला क्षेत्र भी प्रभावित हुए हैं, जिससे बचाव दल और प्रशासनिक कर्मियों के लिए आपदाग्रस्त स्थानों तक पहुंचना मुश्किल हो गया है।
पिछले कुछ दिनों से हो रही भारी बारिश के कारण राज्य की कई सड़कें अवरुद्ध हो गई हैं।
जनता से अनावश्यक यात्रा से बचने, नदियों, नालों, खड्डों और भूस्खलन संभावित ढलानों से दूर रहने और उफनते पुलों या बाढ़ग्रस्त सड़कों को पार करने का प्रयास न करने का अनुरोध किया गया है।

