नूरपुर के जाछ स्थित क्षेत्रीय बागवानी अनुसंधान एवं प्रशिक्षण केंद्र ने मंगलवार को कांगड़ा जिले के फतेहपुर में कौशल विकास किसान-सह-उत्पादक मेले का आयोजन किया। इस आयोजन में क्षेत्र के लगभग 500 किसानों और फल उत्पादकों ने भाग लिया, जिसका उद्देश्य कृषि कौशल को बढ़ाना और आजीविका के अवसरों में सुधार करना था।
इस मेले में एक व्यापक प्रदर्शनी लगाई गई थी, जिसमें उत्पादकों ने स्थानीय स्तर पर उत्पादित फल, सब्जियां, कृषि वानिकी आधारित उत्पाद और मूल्यवर्धित वस्तुएं प्रदर्शित कीं। लगभग 120 स्थानीय किसानों ने औषधीय पौधों, सब्जियों और प्राकृतिक खेती से प्राप्त बागों की उपज सहित अपने उत्पाद प्रदर्शित किए। मेले की अध्यक्षता कर रहे स्थानीय विधायक भवानी पठानिया ने प्रदर्शनी का निरीक्षण किया और किसानों से बातचीत की। उन्होंने नवीन और प्रौद्योगिकी आधारित कृषि पद्धतियों को अपनाने के लिए किसानों के प्रयासों की सराहना की।
पठानिया ने कहा कि इस तरह के मेले किसानों को प्रोत्साहित करने और कृषि क्षेत्र में आत्मनिर्भरता को बढ़ावा देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। उन्होंने उत्पादकता और किसानों की आय बढ़ाने के लिए प्राकृतिक खेती और वैज्ञानिक, अनुसंधान-आधारित पद्धतियों को अपनाने की आवश्यकता पर बल दिया।
डॉ. वाई.एस. परमार बागवानी एवं वानिकी विश्वविद्यालय, सोलन के सेवानिवृत्त अनुसंधान निदेशक संजीव चौहान ने नवाचार, कौशल विकास और आधुनिक कृषि प्रौद्योगिकियों के महत्व पर प्रकाश डाला। उन्होंने सतत कृषि के लिए बायोचार, प्राकृतिक खेती और कृषि वानिकी के उपयोग को महत्वपूर्ण बताया। स्टेशन के सह-निदेशक विपिन गुलेरिया ने किसानों को उभरती प्रौद्योगिकियों से अवगत होने के लिए ऐसे मंचों का सर्वोत्तम उपयोग करने के लिए प्रोत्साहित किया।
अनुसंधान एवं प्रशिक्षण केंद्र के प्रधान वैज्ञानिक राजेश कलेर के नेतृत्व में एक विशेषज्ञ पैनल ने प्रदर्शित उत्पादों का मूल्यांकन किया। सर्वश्रेष्ठ कृषि उपज के लिए नौ किसानों का चयन किया गया और पठानिया ने उन्हें नकद पुरस्कार और प्रमाण पत्र प्रदान किए।

