केंद्र सरकार की ग्रामीण जल प्रबंधन के विकेंद्रीकरण की नीति के अनुरूप, कांगड़ा जिले की लगभग 750 ग्रामीण जल आपूर्ति योजनाओं को जल शक्ति विभाग (जेएसडी) से संबंधित ग्राम पंचायतों को हस्तांतरित किया जाना है। इस कदम का उद्देश्य ग्रामीण घरों में पाइप के माध्यम से पेयजल वितरण की जिम्मेदारी पंचायतों को सौंपकर जमीनी स्तर पर शासन को मजबूत करना है।
धर्मशाला स्थित जेएसडी के मुख्य अभियंता दीपक गर्ग ने बताया कि चिन्हित सभी ग्रामीण जल आपूर्ति योजनाओं का ग्राम स्तरीय बुनियादी ढांचा ग्राम पंचायतों को सौंपा जा रहा है। पंचायतें भंडारण टैंकों से उपभोक्ताओं तक पाइप के माध्यम से पानी के वितरण की निगरानी करेंगी, जबकि योजनाओं का संचालन एवं रखरखाव विभाग द्वारा ही किया जाता रहेगा।
गर्ग ने आगे बताया कि ग्राम पंचायतों ने इन जल आपूर्ति योजनाओं के संचालन और रखरखाव को सुविधाजनक बनाने के लिए 15 वें वित्त आयोग के तहत प्राप्त धनराशि पहले ही विभाग को हस्तांतरित कर दी है।
पंचायती राज विभाग द्वारा 27 फरवरी को जारी एक कार्यालय आदेश के अनुसार, राज्य सरकार ने सभी ब्लॉक विकास अधिकारियों (बीडीओ) को 5, 6 और 7 मार्च को राज्य भर में विशेष ग्राम सभा बैठकें आयोजित करने का निर्देश दिया है। इन बैठकों में ग्राम पंचायतों को पेयजल अवसंरचना के हस्तांतरण और ग्रामीण उपभोक्ताओं तक पाइप के माध्यम से जल वितरण की व्यवस्था से संबंधित प्रस्तावों पर विचार-विमर्श और अनुमोदन किया जाएगा।
औपचारिक हस्तांतरण के बाद, ग्राम पंचायतों को जल आपूर्ति सेवाओं के लिए उपयोगकर्ता शुल्क लगाने और वसूलने का अधिकार दिया जाएगा। अनुमोदित शुल्क गरीबी रेखा से ऊपर (एपीएल) परिवारों के लिए 100 रुपये प्रति माह और गरीबी रेखा से नीचे (बीपीएल) परिवारों के लिए 25 रुपये प्रति माह निर्धारित किया गया है।
इसके अतिरिक्त, पंचायतें पेयजल योजनाओं के लिए 15 वें वित्त आयोग के तहत आवंटित अप्रयुक्त बंधित अनुदानों को जल स्रोत से लेकर वितरण टैंकों तक संचालन एवं रखरखाव लागतों को कवर करने के लिए जेएसडी को हस्तांतरित करना सुनिश्चित करेंगी । सूत्रों के अनुसार, भारत सरकार की संचालन एवं रखरखाव नीति के अनुरूप, ग्रामीण पेयजल अवसंरचना के सतत प्रबंधन में सहयोग के लिए ये अनुदान सीधे ग्राम पंचायतों को हस्तांतरित किए जाते हैं।

