झारखंड के गोड्डा में पुलिस मुठभेड़ में मारे गए आदिवासी नेता सूर्या हांसदा की मौत की सीबीआई जांच को लेकर दायर क्रिमिनल रिट पर शुक्रवार को झारखंड उच्च न्यायालय में सुनवाई हुई। राज्य सरकार की ओर से अब तक जवाब दाखिल नहीं किए जाने पर अदालत ने कड़ी नाराजगी जताई।
कोर्ट ने सरकार को जवाब देने के लिए एक सप्ताह का वक्त दिया है। मामले की सुनवाई न्यायमूर्ति अंबुज नाथ की पीठ में हुई। प्रार्थी की ओर से अधिवक्ता कुमार हर्ष ने बहस की। सूर्या हांसदा की पत्नी सुशीला मुर्मू और मां नीलमुनी मुर्मू ने दायर याचिका में आरोप लगाया है कि यह मुठभेड़ फर्जी थी और पूरे प्रकरण की जांच सीबीआई से कराई जानी चाहिए।
याचिका में कहा गया है कि पुलिस ने घटना को मुठभेड़ का रूप दिया, जबकि सूर्या को जानबूझकर निशाना बनाया गया। प्रार्थियों ने उच्च न्यायालय से स्वतंत्र एजेंसी से जांच कराने की मांग की है ताकि तथ्य सामने आ सकें।
बता दें कि गोड्डा पुलिस ने 11 अगस्त को बोआरीजोर थाना क्षेत्र के धमनी पहाड़ के पास मुठभेड़ में सूर्या हांसदा के मारे जाने का दावा किया था। पुलिस के अनुसार सूर्या के खिलाफ 20 से अधिक आपराधिक मामले दर्ज थे और वह कई गंभीर घटनाओं में वांछित था। पुलिस ने मुठभेड़ स्थल से हथियार बरामद किए जाने की भी जानकारी दी थी।
गोड्डा के एसपी मुकेश कुमार के मुताबिक, सूर्या की गिरफ्तारी के बाद पुलिस टीम उसे हथियार बरामदगी के लिए ले जा रही थी। इसी दौरान उसके गैंग के सदस्यों ने पुलिस पर हमला करने का प्रयास किया। पुलिस का दावा है कि इस बीच सूर्या ने एक पुलिसकर्मी का हथियार छीनकर भागने की कोशिश की, जिसके बाद जवाबी कार्रवाई में वह मारा गया।
राष्ट्रीय अनुसूचित जनजाति आयोग ने भी सूर्या हांसदा की पुलिस मुठभेड़ में मौत को संदेहास्पद करार देते हुए पूरे प्रकरण की सीबीआई जांच की अनुशंसा की थी। आयोग की जांच टीम ने गोड्डा में घटनास्थल का दौरा किया था और संबंधित पक्षों के बयान दर्ज किए थे।


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