March 30, 2026
National

उत्तर प्रदेश में अखिलेश यादव की दाल नहीं गलेगी : ब्रजेश पाठक

Akhilesh Yadav will not succeed in Uttar Pradesh: Brajesh Pathak

29 मार्च । उत्तर प्रदेश के डिप्टी सीएम ब्रजेश पाठक और केशव प्रसाद मौर्य ने समाजवादी पार्टी (सपा) के मुखिया अखिलेश यादव की दादरी में हुई जनसभा को फ्लॉप शो करार दिया।

डिप्टी सीएम ब्रजेश पाठक ने कहा कि सपा प्रमुख भले ही कितने भी प्रयास कर लें, जनता उनके कार्यकाल को भूली नहीं है। इसीलिए, यूपी में अखिलेश यादव की दाल नहीं गलेगी। उन्होंने दावा किया कि सपा प्रमुख का दादरी दौरा पूर्ण रूप से फ्लॉप रहा है। उनकी जनसभा की खाली कुर्सियां गवाह है कि उनकी रैली फ्लॉप रही। सौ विधानसभा के कार्यकर्ताओं को इकट्ठा करने के बावजूद जनसभा में कुर्सियां खाली रह गईं।

उन्होंने कहा कि अखिलेश यादव का एक ही विजन, एक ही लक्ष्य है गुंडाराज, भ्रष्टाचार और जातिवाद के वही पुराने हथकंडों से सत्ता पाना, सपा का पीडीए केवल परिवार डेवलपमेंट अथॉरिटी है। अखिलेश यादव सपा के भय और आतंक के पुनर्जागरण हेतु दादरी रैली ही नहीं कितनी भी रैलियां कर लें, कितने भी रंग बदल लें, लेकिन गुंडाराज, भ्रष्टाचार और परिवारवाद का समय कब का समाप्त हो चुका है। इनकी रैलियां सिर्फ नाम की हैं, न इनका जनता से सरोकार है और न जनता का इनसे कोई सरोकार है। जनता सपा के कारनामों को भूली नहीं है। दंगों की आग में न जाने कितने बेटे अनाथ हो गए, कितनी माताओं की गोद सूनी हो गई। बेटियां असुरक्षित थी, बेटों का अधिकार छीना जाता था। लूट, अपहरण के उस अंधकार के युग को जनता कभी भूल नहीं सकती और न ही इन्हें माफ करने वाली है।

डिप्टी सीएम ने कहा कि आज उत्तर प्रदेश की सरकार में सुशासन का राज है, सेवा, समर्पण, सम्मान और गरीब कल्याण की नीतियों से जनता खुशहाल है। उत्तर प्रदेश अभूतपूर्व उपलब्धियों के साथ विकास के पथ तेजी से अग्रसर है। जिस नोएडा की यह बात करते हैं, उस नोएडा के नाम से कांपते थे। अंधविश्वास के साये में विकास की मुख्यधारा से अछूते नोएडा को हमारी ही सरकार ने अंधविश्वास के अंधकार से बाहर निकालकर विकास की मुख्यधारा से जोड़ा है। उत्तर प्रदेश में पुनः भारतीय जनता पार्टी तीसरी बार सरकार बनाने जा रही है। जनता का आशीर्वाद और विश्वास सिर्फ भाजपा के साथ है।

डिप्टी सीएम केशव प्रसाद मौर्य ने कहा कि समाजवादी पार्टी की दादरी रैली ‘सद्भावना’ नहीं, बल्कि ‘दुर्भावना’ रैली साबित हुई। यह रैली उस अराजक दौर की याद दिलाने का प्रयास थी, जब कानून-व्यवस्था सवालों के घेरे में थी, अपराधियों का मनोबल ऊंचा था और आम नागरिक खुद को असुरक्षित महसूस करता था। सपा मुखिया अखिलेश यादव की तुष्टिकरण की वही राजनीति फिर सामने आई, जिसने कभी प्रदेश को ‘अराजकता और असुरक्षा’ के दौर में धकेला था। यह रैली 2012 से 2017 के सपा शासनकाल के उस अंधेरे अध्याय को फिर से जीवित करने की कोशिश थी, जिसे प्रदेश की जनता साफ तौर पर नकार चुकी है।

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