8 अप्रैल । लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी द्वारा सार्वजनिक क्षेत्र के ठेकों से बहुजन उद्यमियों के “व्यवस्थित बहिष्कार” पर चिंता जताने के बाद भाजपा ने बुधवार को कांग्रेस पर तीखा हमला करते हुए उसे “दलित विरोधी” करार दिया।
यह राजनीतिक बहस राहुल गांधी द्वारा संसद में दिए गए उन बयानों के बाद शुरू हुई, जिनमें उन्होंने पिछले वर्ष दिए गए 16,500 करोड़ रुपए के सार्वजनिक निर्माण अनुबंधों के वितरण को लेकर सरकार पर सवाल उठाए थे।
उन्होंने विशेष रूप से यह जानकारी मांगी थी कि इन अनुबंधों का कितना हिस्सा दलितों, आदिवासियों और अन्य पिछड़ा वर्ग के स्वामित्व वाले व्यवसायों को आवंटित किया गया था।
राहुल गांधी के बयान पर प्रतिक्रिया देते हुए भाजपा नेताओं ने कांग्रेस पर दलित समुदायों को हाशिए पर धकेलने का लंबा इतिहास होने का आरोप लगाया और वर्तमान सरकार की नीतियों की आलोचना को खारिज कर दिया।
भाजपा के राष्ट्रीय प्रवक्ता सी.आर. केशवन ने आईएएनएस से बात करते हुए आरोप लगाया कि कांग्रेस ने वर्षों से लगातार “दलित-विरोधी मानसिकता” का प्रदर्शन किया है। जवाहरलाल नेहरू से लेकर अब राहुल गांधी तक, कांग्रेस पार्टी दलित समुदाय की गरिमा का अपमान करने में बार-बार दोषी रही है। मल्लिकार्जुन खड़गे ने स्वयं कई मौकों पर अपनी निराशा व्यक्त की है और बेबसी जताते हुए कहा है कि अंतिम निर्णय उनके हाथ में नहीं है।”
केशवन ने कहा, “कांग्रेस पार्टी के पहले परिवार ने कांग्रेस अध्यक्ष के पद को इस तरह से अपमानित और नीचा दिखाया है कि यह महज़ एक रबर स्टैंप बनकर रह गया है, जिस पर अब मल्लिकार्जुन खड़गे काबिज हैं।”
उन्होंने कहा, “कोई नहीं भूल सकता कि प्रियंका गांधी के नामांकन दाखिल करने के दौरान गांधी परिवार ने खड़गे का किस तरह अपमानित किया था। उन्हें बाहर खड़ा कर दिया गया था। कांग्रेस इसी तरह काम करती है। उन्होंने डॉ. बी.आर. अंबेडकर को भारत रत्न से भी वंचित कर दिया था।”
केशवन ने कहा, “कांग्रेस पार्टी की ‘दलित-विरोधी मानसिकता’ है, और राहुल गांधी भी उसी का पालन करते हैं।”


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